जबलपुर में नेशनल हाईवे के जबलपुर–हिरन नदी मार्गखंड के 28 किमी पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की रिटेनिंग वॉल 22 फरवरी 2026 की शाम क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद एहतियातन प्रभावित हिस्से पर यातायात रोक दिया गया और वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकाला गया। सूचना मिलते ही पुलिस और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) का अमला मौके पर पहुंचा। एमपीआरडीसी के संभागीय प्रबंधक की शिकायत पर 23 फरवरी 2026 को शाहपुरा थाने में FIR दर्ज की गई। मामला धारा 285, 290, 324(5), 125 एवं 3(5) के तहत पंजीबद्ध है। जांच की जिम्मेदारी थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार धुर्वे को सौंपी गई है। 2017 में अनुबंध, 2022 में निर्माण पूरा; लागत 400 करोड़ जबलपुर–हिरन नदी मार्ग के पैकेज-1 अंतर्गत 4-लेन उन्नयन कार्य का अनुबंध 19 दिसंबर 2017 को हुआ था। परियोजना का निर्माण 7 फरवरी 2022 को पूरा किया गया, जिसे लगभग 4 वर्ष 2 माह में पूर्ण किया गया। इस परियोजना की लागत करीब 400 करोड़ रुपए बताई जा रही है। निर्माण कार्य ईपीसी मोड पर मैसर्स आरएसआरआईपीएल‑मेर्सी जॉइंट वेंचर द्वारा किया गया था। 50 वर्ष की आयु, 4 साल में दूसरी बार क्षति विभागीय जानकारी के अनुसार आरओबी की अनुमानित आयु 50 वर्ष बताई गई थी। इससे पहले 9 सितंबर 2025 को भी इसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। अब दोबारा रिटेनिंग वॉल धंसने से निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में मानकों के पालन में कमी का उल्लेख किया गया है। कंपनी पहले ही ब्लैकलिस्ट, मार्ग डीएलपी में एमपीआरडीसी के अनुसार गुणवत्ता से जुड़े कारणों के चलते संबंधित कंपनी को 2 जनवरी 2026 को डिबार (ब्लैकलिस्ट) किया जा चुका है। मार्ग वर्तमान में Defect Liability Period (DLP) में है, इसलिए मरम्मत कार्य और उससे जुड़ा पूरा खर्च ठेकेदार द्वारा ही वहन किया जाएगा। मंत्री बोले- एक माह में सुरक्षित यातायात का लक्ष्य लोकनिर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा कि आरओबी की रिटेनिंग वॉल का क्षतिग्रस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि सड़क विकास निगम ने युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है और एक माह के भीतर सुधार कर सुरक्षित यातायात बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने, FIR दर्ज कराने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा के लिहाज से डायवर्जन मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था और संकेतक लगाए गए हैं। साथ ही रेलवे अधिकारियों से समन्वय कर पूर्व की लेवल क्रॉसिंग को पुनः शुरू करने की प्रक्रिया भी चल रही है।


