संघर्ष की आवाज खामोश, अंतिम लाल सलाम

संघर्ष की आवाज खामोश, अंतिम लाल सलाम

श्रीगंगानगर। प्रदेश के वरिष्ठ और संघर्ष के पर्याय माने जाने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल का सोमवार रात निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और शहर के एक निजी अस्पताल में रात करीब सवा ग्यारह बजे अंतिम सांस ली। बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चरणदास कम्बोज ने बताया कि बेनीवाल की अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी में मंगलवार को निकाली जाएगी। सादुलशहर और श्रीगंगानगर क्षेत्र से लंबे समय तक सक्रिय रहे बेनीवाल किसानों और मजदूरों के अधिकारों की बुलंद आवाज थे। उन्होंने घड़साना किसान आंदोलन सहित अनेक जन आंदोलनों का नेतृत्व किया और अपने संघर्षों के चलते लगभग छह वर्ष जेल में भी बिताए। 95 वर्ष की आयु में भी वे जन सरोकारों से जुड़े रहे और क्षेत्र की समस्याओं को मुखरता से उठाते रहे। उनके राजनीतिक जीवन की पहचान कृषि, पानी और स्थानीय मुद्दों पर अडिग रुख रही। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। विभिन्न राजनीतिक संगठनों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें “जन संघर्षों का सच्चा योद्धा” बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

जब-जब आंदोलन होंगे, तब-तब याद आएंगे बेनीवाल

दुबले-पतले, करीब छह फीट लंबे बेनीवाल का व्यक्तित्व भले ही साधारण दिखाई देता था, लेकिन भीतर जन संघर्ष की ऐसी आग थी, जो आंदोलनों में नई ऊर्जा भर देती थी। वे हुंकार भरते तो मानो आंदोलन की दिशा तय हो जाती। जिला मुख्यालय से लेकर घड़साना तक जब भी किसानों या आमजन का आंदोलन हुआ, बेनीवाल अग्रिम पंक्ति में नजर आए। पीड़ितों के मसीहा बनकर वे हर मोर्चे पर डटे रहे। किसानों की भीड़ के बीच उनकी आवाज गूंजती तो आंदोलन को नया जोश मिल जाता। संघर्ष को संगठित कर आगे बढ़ाने की अद्भुत क्षमता उनमें थी। उनका जन्म 10 जून 1934 को सुखचेन (पंजाब) में हुआ। बीकानेर के डूंगर कॉलेज से स्नातकोत्तर एमए तक पढाई की।

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