रायपुर। राज्य पुलिस अब हाइटेक तरीके से अपराध की विवेचना करेगी। इसके लिए वारदात के बाद घटनास्थल से पकड़े गए अपराधियों और संदेहियों के फिंगरप्रिंट लिए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय 504 फिंगरप्रिंट किट की खरीदी कर रहा है।
इस किट में फिंगरप्रिंट पाउडर (सिल्वर/ग्रे और काला) प्लास्टिक हैंडल वाला मराबू फेदर ब्रश, हैंड मैग्नीफाइंग लेंस, लिफ्टिंग टेप, फिंगरप्रिंट लिफ्टिंग कार्ड, रिचार्जेबल एलईडी टॉर्च, स्टील ब्लेड वाली कैंची,कॉटन ग्लोब और उक्त सामान को सुरक्षित रूप से कलेक्ट करने के बाद नायलॉन, पॉलिएस्टर या पीयू बैग की खरीदी की जा रही है।
सामान की खरीदी के बाद सभी थानों को किट का वितरण किया जाएगा। इससे अपराधों को सुलझाने में मदद मिलेगी और अपराधियों की पहचान करना आसान होगा। बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने यक्ष नाम के नए ऐप के जरिए 50 हजार से ज्यादा आरोपियों का फोटो, फिंगरप्रिंट और वॉइस सैंपल लेकर उनकी यूनिक आईडी बनाने की योजना बनाई है।
इससे पुलिस को किसी भी अपराधी का पूरा रिकॉर्ड एक क्लिक में मिल सकेगा और दोबारा अपराध करने पर तुरंत पहचान संभव होगी। इसी तरह हरियाणा पुलिस ने अपराधियों के फिंगरप्रिंट, डीएनए और रेटिना स्कैन करने की योजना बनाई है। जिससे अपराधियों की पहचान करना और भी आसान होगा ।
अपराधियों की पहचान का अचूक तरीकाफिंगरप्रिंट तकनीक एक ऐसी प्रणाली है जो व्यक्ति की पहचान करने के लिए अंगुलियों के निशान का उपयोग करती है। यह तकनीक अपराधों की जांच में बहुत उपयोगी साबित होती है। क्योंकि हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी अपराध में शामिल होता है, तो पुलिस उसके फिंगरप्रिंट संग्रह करती है।
इसका विश्लेषण विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से किया जाता है। साथ ही फिंगरप्रिंट को डेटाबेस में मौजूद फिंगरप्रिंट से मिलाया जाता है। इसके मैच होने पर अपराधी की पहचान हो जाती है। इस तकनीक का उपयोग करने से अपराधियों की पहचान करने में मदद मिलती है। किसी भी तरह का सबति और अपराध में संलिप्तता मिलने पर संबंधित संदेही के खिलाफ जांच शुरू करती है और सबूत इकट्ठा करती है।
पर्याप्त सबूत मिलते ही अपराधी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाता है।
इस तरह होगा फिंगरप्रिंट कलेक्ट
1 पाउडर मेथड – यह सबसे आम तरीका है, जिसमें फिंगरप्रिंट को पाउडर की मदद से देखा जाता है।
2 केमिकल मेथड – इसमें फिंगरप्रिंट को निन्हाइड्रिन या सिल्वर नाइट्रेट केमिकल की मदद से निशान एकत्रित किया जाएगा।
3 लेजर मेथड- इसमें लेजर की मदद से फिंगरप्रिंट की जांच की जाती है।
4 फिंगरप्रिंट लिफ्टर इसमें एक विशेष टेप की मदद से फिंगरप्रिंट को कलेक्ट किया जाता है
5 डिजिटल फिंगरप्रिंट – इसमें फिंगरप्रिंट को डिजिटल रूप में संग्रहित किया जाता है। कोर्ट में फिंगरप्रिंट की वैधता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि यह अपराधी की पहचान करने में मदद करता है। बता दें कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 45 में फिंगरप्रिंट को साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई है।
फिंगरप्रिंट एक्ट 1961 में फिंगरप्रिंट के संग्रहण, संग्रहण और उपयोग के लिए नियम बनाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में फिंगरप्रिंट की वैधता को मान्यता दी है।खरीदी होगीफिंगरप्रिंट किट की खरीदी के लिए विभाग की ओर से निविदा जारी की गई है। खरीदी के बाद सभी पुलिस थानों को जरूरत के अनुसार इसका वितरण किया जाएगा।अरूण देव गौतम, डीजीपी


