भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों में जीतनी बार पाकिस्तान को हार मिली है, उससे ज्यादा बार कांग्रेस चुनाव हार चुकी है। ये बातें जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोमवार को दरभंगा में कही। उन्होंने ये भी कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा को सुधारने की कोशिशें हुईं, लेकिन जैसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बदलाव चाहते थे, उस तरह का बदलाव नहीं हो पाया। दरअसल, राज्यसभा सांसद संजय झा आज बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी के आवास पर पहुंचकर उनकी मां को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे श्यामा माई मंदिर पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में बने विवाह भवन के विस्तारीकरण कार्य का निरीक्षण किया। साथ ही अतिथि भवन का उद्घाटन भी किया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रयास किए, परंतु कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया में व्याप्त समस्याएं बड़ी बाधा रही हैं। बिहार सरकार पैसा देती है, लेकिन कुलपति किस एजेंडा के साथ आते हैं, उस पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि हम उच्च शिक्षा को वैसा नहीं बना पाए जैसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते थे। बोले- कुलपति अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं संजय झा ने आरोप लगाया कि कुलपति अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं, जिनका छात्रों या राज्य सरकार की प्राथमिकताओं से सीधा संबंध नहीं रहता। उन्होंने विशेष रूप से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं सिंडिकेट सदस्य के रूप में एक बैठक में मौजूद थे, जहां सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को पीएचडी की उपाधि देने का प्रस्ताव आया था। संजय झा के अनुसार, उन्होंने उस समय सवाल उठाया था कि मिथिला विश्वविद्यालय से उनका क्या संबंध है? बाद में उन्हें बताया गया कि यह निर्णय चांसलर की पैरवी पर लिया गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल मिथिला विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों की स्थिति की बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में ही मूल समस्या है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। संजय झा बोले- सिर्फ एक नहीं पूरे बिहार की यूनिवर्सिटी व्यवस्था में सुधार की जरूरत संजय झा ने कहा कि केवल एक विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे बिहार की विश्वविद्यालय व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने दावा किया कि सिंडिकेट सदस्य रहते हुए उन्होंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया, जहां बाहरी हस्तक्षेप की चर्चा सामने आई। “कुछ सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है। संजय झा ने बताया कि उन्होंने एक इस जमीन को श्यामा मन्दिर ट्रस्ट को देने की वकालत की थी, ताकि वहां “विवाह भवन” बनाया जा सके और गरीब परिवारों को शादी समारोह के लिए सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उद्घाटन के लिए भी बुलाया गया था और यह परियोजना सामाजिक हित में थी। राज्यसभा सांसद ने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत पर भी चिंता जताई संजय झा ने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत पर चिंता जताते हुए कहा कि हजारों वर्षों का इतिहास आज भी वैश्विक स्तर पर सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि मिथिला रिसर्च इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग बन रही है, लेकिन असली काम दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन और शोध अभी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मिथिला की विरासत बहुत बड़ी पूंजी है। हमारे पास ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिन पर गंभीर शोध की जरूरत है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपने फंड से भी सहयोग करूंगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मिथिला के इतिहास को वैश्विक मानचित्र पर लाना उनकी प्राथमिकता है और संसद में भी इस दिशा में पहल की जा रही है। अंत में उन्होंने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना समय की मांग है। पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया, शोध को बढ़ावा और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, ये सभी राज्य के भविष्य के लिए जरूरी हैं। देश की 58 फीसदी आबादी युवा, ये देश की सबसे बड़ी पूंजी राज्यसभा सांसद संजय झा ने ग्लोबल AI समिट और देश की तकनीकी प्रगति के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत आज दुनिया के सामने एक नई ताकत के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है, जो भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि अगर इस युवा आबादी को टेक्नोलॉजी और स्किलिंग से जोड़ा जाए तो भारत विश्व स्तर पर बड़ी छलांग लगा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाकर राहुल गांधी ने अपना कपड़ा उतार दिया इससे बड़ा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है। संजय झा ने कहा कि आज कई विकसित देशों में बुजुर्ग आबादी अधिक है और युवा जनसंख्या कम, जबकि भारत के पास युवा शक्ति का बड़ा आधार है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में निवेश और भागीदारी देश को नई दिशा दे सकती है। ‘देश की छवि को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है’ संजय झा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में AI के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांति संभव है,स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बेहतर रेगुलेशन हो सकता है,शिक्षा क्षेत्र में नई तकनीकी क्रांति लाई जा सकती है। उन्होंने कहा की ग्लोबल AI मंच पर दुनिया की शीर्ष कंपनियों और देशों की भागीदारी भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाती है। ऐसे अवसरों पर देश की छवि को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है। संजय झा ने विपक्ष और खासकर पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध की राजनीति करते-करते अब कुछ नेता देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद में कांग्रेस की सीटें कम आईं, जिसे लेकर जनता सब देख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की छवि कांग्रेस पार्टी से बड़ी है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। गेस्ट टीचर के सवाल पर संजय झा ने कहा कि पहले अस्थायी तौर पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, बाद में परीक्षा के माध्यम से स्थायी शिक्षक नियुक्त किए गए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे संबंधित मंत्री से दोबारा बात करेंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों में जीतनी बार पाकिस्तान को हार मिली है, उससे ज्यादा बार कांग्रेस चुनाव हार चुकी है। ये बातें जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोमवार को दरभंगा में कही। उन्होंने ये भी कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा को सुधारने की कोशिशें हुईं, लेकिन जैसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बदलाव चाहते थे, उस तरह का बदलाव नहीं हो पाया। दरअसल, राज्यसभा सांसद संजय झा आज बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी के आवास पर पहुंचकर उनकी मां को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे श्यामा माई मंदिर पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में बने विवाह भवन के विस्तारीकरण कार्य का निरीक्षण किया। साथ ही अतिथि भवन का उद्घाटन भी किया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रयास किए, परंतु कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया में व्याप्त समस्याएं बड़ी बाधा रही हैं। बिहार सरकार पैसा देती है, लेकिन कुलपति किस एजेंडा के साथ आते हैं, उस पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि हम उच्च शिक्षा को वैसा नहीं बना पाए जैसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते थे। बोले- कुलपति अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं संजय झा ने आरोप लगाया कि कुलपति अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं, जिनका छात्रों या राज्य सरकार की प्राथमिकताओं से सीधा संबंध नहीं रहता। उन्होंने विशेष रूप से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं सिंडिकेट सदस्य के रूप में एक बैठक में मौजूद थे, जहां सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को पीएचडी की उपाधि देने का प्रस्ताव आया था। संजय झा के अनुसार, उन्होंने उस समय सवाल उठाया था कि मिथिला विश्वविद्यालय से उनका क्या संबंध है? बाद में उन्हें बताया गया कि यह निर्णय चांसलर की पैरवी पर लिया गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल मिथिला विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों की स्थिति की बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में ही मूल समस्या है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। संजय झा बोले- सिर्फ एक नहीं पूरे बिहार की यूनिवर्सिटी व्यवस्था में सुधार की जरूरत संजय झा ने कहा कि केवल एक विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे बिहार की विश्वविद्यालय व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने दावा किया कि सिंडिकेट सदस्य रहते हुए उन्होंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया, जहां बाहरी हस्तक्षेप की चर्चा सामने आई। “कुछ सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है। संजय झा ने बताया कि उन्होंने एक इस जमीन को श्यामा मन्दिर ट्रस्ट को देने की वकालत की थी, ताकि वहां “विवाह भवन” बनाया जा सके और गरीब परिवारों को शादी समारोह के लिए सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उद्घाटन के लिए भी बुलाया गया था और यह परियोजना सामाजिक हित में थी। राज्यसभा सांसद ने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत पर भी चिंता जताई संजय झा ने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत पर चिंता जताते हुए कहा कि हजारों वर्षों का इतिहास आज भी वैश्विक स्तर पर सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि मिथिला रिसर्च इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग बन रही है, लेकिन असली काम दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन और शोध अभी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मिथिला की विरासत बहुत बड़ी पूंजी है। हमारे पास ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिन पर गंभीर शोध की जरूरत है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपने फंड से भी सहयोग करूंगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मिथिला के इतिहास को वैश्विक मानचित्र पर लाना उनकी प्राथमिकता है और संसद में भी इस दिशा में पहल की जा रही है। अंत में उन्होंने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना समय की मांग है। पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया, शोध को बढ़ावा और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, ये सभी राज्य के भविष्य के लिए जरूरी हैं। देश की 58 फीसदी आबादी युवा, ये देश की सबसे बड़ी पूंजी राज्यसभा सांसद संजय झा ने ग्लोबल AI समिट और देश की तकनीकी प्रगति के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत आज दुनिया के सामने एक नई ताकत के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है, जो भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि अगर इस युवा आबादी को टेक्नोलॉजी और स्किलिंग से जोड़ा जाए तो भारत विश्व स्तर पर बड़ी छलांग लगा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाकर राहुल गांधी ने अपना कपड़ा उतार दिया इससे बड़ा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है। संजय झा ने कहा कि आज कई विकसित देशों में बुजुर्ग आबादी अधिक है और युवा जनसंख्या कम, जबकि भारत के पास युवा शक्ति का बड़ा आधार है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में निवेश और भागीदारी देश को नई दिशा दे सकती है। ‘देश की छवि को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है’ संजय झा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में AI के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांति संभव है,स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बेहतर रेगुलेशन हो सकता है,शिक्षा क्षेत्र में नई तकनीकी क्रांति लाई जा सकती है। उन्होंने कहा की ग्लोबल AI मंच पर दुनिया की शीर्ष कंपनियों और देशों की भागीदारी भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाती है। ऐसे अवसरों पर देश की छवि को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है। संजय झा ने विपक्ष और खासकर पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध की राजनीति करते-करते अब कुछ नेता देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद में कांग्रेस की सीटें कम आईं, जिसे लेकर जनता सब देख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की छवि कांग्रेस पार्टी से बड़ी है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। गेस्ट टीचर के सवाल पर संजय झा ने कहा कि पहले अस्थायी तौर पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, बाद में परीक्षा के माध्यम से स्थायी शिक्षक नियुक्त किए गए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे संबंधित मंत्री से दोबारा बात करेंगे।


