चंडीगढ़ DRT में रिक्त पदों पर हाईकोर्ट सख्त:केंद्र सरकार से मांगा जवाब, सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण निर्देश देने से इनकार

चंडीगढ़ DRT में रिक्त पदों पर हाईकोर्ट सख्त:केंद्र सरकार से मांगा जवाब, सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण निर्देश देने से इनकार

चंडीगढ़ स्थित डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल में जुडशियल आफिसर के रिक्त पदों को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि इन पदों को भरने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से लागू स्थगन आदेश के चलते हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में कोई अंतिम दिशा-निर्देश पारित नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ की तीनों डीआरटी में नियुक्तियों की वर्तमान स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मांगी। अदालत के समक्ष बताया गया कि दो अधिकरण पहले से ही नियमित पीठासीन अधिकारियों के बिना काम कर रहे हैं, जबकि तीसरे अधिकरण के अधिकारी का कार्यकाल मार्च में समाप्त होने वाला है। केंद्र ने कहा—मामला एसीसी के पास लंबित केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने अदालत को अवगत कराया कि नियुक्तियों का मामला फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) के समक्ष लंबित है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मौजूदा व्यवस्था केवल अस्थायी समाधान है और स्थायी नियुक्तियां आवश्यक हैं। अदालत ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण वह सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। मामलों की सुनवाई करता चंडीगढ़ डीआरटी चंडीगढ़ के तीनों डीआरटी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के मामलों की सुनवाई करते हैं। यदि समय रहते नई नियुक्तियां नहीं हुईं या कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया, तो क्षेत्र पूरी तरह से कार्यशील डीआरटी से वंचित हो सकता है। इसका सीधा असर बैंकों, वित्तीय संस्थानों, उधारकर्ताओं और न्यायिक व्यवस्था पर पड़ेगा। अदालत को बताया गया कि डीआरटी-द्वितीय पहले से ही बिना स्थायी पीठासीन अधिकारी के कार्य कर रहा है। डीआरटी-प्रथम और द्वितीय दोनों के कार्यकाल समाप्ति की ओर हैं। प्रतिदिन 70 से 100 मामलों की सूची लगती है, जिनमें 30 से 40 मामले अत्यावश्यक प्रकृति के होते हैं। यदि अधिकरण निष्क्रिय हो गए तो उच्च न्यायालय में सैकड़ों याचिकाएं दायर हो सकती हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। देशभर में 2.48 लाख से अधिक मामले लंबित देश में कुल 39 डीआरटी कार्यरत हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक इन अधिकरणों में 2,48,458 मामले लंबित थे, जिनमें लगभग 16.13 लाख करोड़ रुपये की राशि दांव पर है। फरवरी-मार्च 2026 तक करीब 20 डीआरटी पीठासीन अधिकारियों का चार वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिससे कई अधिकरण निष्क्रिय होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। चंडीगढ़ डीआरटी-द्वितीय लंबित मामलों के मामले में देश के शीर्ष 10 अधिकरणों में शामिल है। ये शीर्ष 10 डीआरटी कुल लंबित मामलों के 43.6 प्रतिशत और कुल लंबित राशि के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाईकोर्ट ने केंद्र से स्पष्ट जवाब मांगा है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया को कब तक अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि न्यायिक और बैंकिंग व्यवस्था प्रभावित न हो।

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