रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पुलिस-प्रशासनिक समन्वय पर रिफ्रेशर कोर्स:अब थाने से अदालत तक की प्रक्रिया तकनीकी और विधिक दक्षता पर आधारित होगी

रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पुलिस-प्रशासनिक समन्वय पर रिफ्रेशर कोर्स:अब थाने से अदालत तक की प्रक्रिया तकनीकी और विधिक दक्षता पर आधारित होगी

बरेली। बदलते आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के मद्देनजर महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एक महत्वपूर्ण रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस-प्रशासनिक समन्वय को बढ़ाना और थाने से अदालत तक की प्रक्रियाओं को तकनीकी तथा विधिक दक्षता पर आधारित करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता, अभिलेखों की शुचिता और विधिक समझ के बिना आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली प्रभावी नहीं हो सकती। प्रो. सिंह ने विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने में पुलिस और अकादमिक संस्थानों के सहयोग को निर्णायक बताया। इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में बरेली जोन के नौ जिलों के 181 थानों से जुड़े पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों ने भाग लिया। अधिकारियों के अनुसार, ये वे कर्मी हैं जो केस डायरी, साक्ष्य संकलन और न्यायालयी प्रक्रिया की रीढ़ माने जाते हैं। पहले सत्र में संयुक्त निदेशक (अभियोजन) अच्छेलाल यादव ने नए आपराधिक कानूनों— भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभियोजन की मजबूती सीधे तौर पर पुलिस विवेचना की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। दूसरे और तीसरे सत्र में उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अहम आदेशों की समीक्षा की गई। संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) के.के. शुक्ल ने चेन ऑफ कस्टडी, रिमांड प्रक्रिया और साक्ष्य प्रस्तुतिकरण जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही, ई-समन, आईसीजेएस, सीसीटीएनएस, ई-मालखाना और एनएसटीईपी जैसी डिजिटल प्रणालियों के प्रभावी उपयोग पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रत्येक सत्र के बाद प्रश्नोत्तर का दौर चला, जिसमें प्रतिभागियों ने कोर्ट में पेशी, केस डायरी की त्रुटियों और डिजिटल पोर्टल पर आने वाली तकनीकी दिक्कतों से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने मौके पर ही समाधान सुझाए, जिससे प्रशिक्षण अधिक व्यावहारिक बन सका। इस कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन रमित शर्मा, पुलिस उपमहानिरीक्षक बरेली परिक्षेत्र अजय कुमार साहनी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कुल 780 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।

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