जयपुर/दिल्ली। राजस्थान की छात्र राजनीति इस समय अपने सबसे दिलचस्प मोड़ पर है। विनोद जाखड़ के NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त तैयार है। कांग्रेस आलाकमान के सामने चुनौती एक ऐसे चेहरे को चुनने की है जो न केवल संगठन को एकजुट रख सके, बल्कि आगामी छात्र संघ चुनावों और 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए ‘यूथ कैडर’ तैयार कर सके।
जयपुर से दिल्ली तक लॉबिंग तेज़
जयपुर के छात्र नेता इन दिनों दिल्ली की सड़कों और दिग्गज नेताओं के आवासों के बाहर चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं। राजस्थान से लेकर राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं के सामने अपना ‘बायोडेटा’ पेश करने के साथ-साथ ये छात्र नेता अपनी सक्रियता का प्रमाण दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर ‘संभावितों’ की जंग
सोशल मीडिया पर समर्थकों ने अपने-अपने पसंदीदा नेताओं के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है। वर्तमान में जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, वे इस प्रकार हैं:
- निर्मल चौधरी: राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय चेहरा।
- महेश चौधरी: संगठन में लंबे समय से सक्रिय और मजबूत पकड़ रखने वाले नेता। विनोद जाखड़ के साथ जेल भी गए थे।
- राजेंद्र गोरा: पूर्व छात्र नेता और संगठन के प्रति समर्पित चेहरा।
- उत्तम चौधरी, राहुल महला और रोहिताश कुमार मीणा: सूत्रों के मुताबिक ये तीनों नेता भी अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर इनकी अच्छी सक्रियता देखी जा रही है।

NSUI में ऐसे होता है ‘अध्यक्ष’ का चयन
NSUI में पदों की नियुक्ति को लेकर आम जनता में अक्सर भ्रम रहता है, लेकिन आपको बता दें कि राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया काफी अलग है:
- राष्ट्रीय अध्यक्ष: यह पद सीधे तौर पर कांग्रेस आलाकमान (मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी) और AICC के हस्तक्षेप से तय होता है। इसमें राष्ट्रीय स्तर की योग्यता, विजन और कई राउंड के कठिन इंटरव्यू (जैसा विनोद जाखड़ के केस में हुआ) होते हैं।
- प्रदेशाध्यक्ष: प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति में ‘प्रदेश प्रभारी’ (State Incharge) और PCC (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) की रिपोर्ट बहुत अहम होती है। यहाँ स्थानीय जातीय समीकरण, गुटीय संतुलन और प्रदेश के बड़े नेताओं (जैसे सचिन पायलट या गोविंद सिंह डोटासरा) की पसंद-नापसंद का बहुत बड़ा रोल होता है। अक्सर इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी बनाई जाती है जो पैनल बनाकर राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजती है। उसके बाद ही किसी एक नाम पर मुहर लगती है।
28 फरवरी के बाद ही खुलेगा सस्पेंस
सूत्रों का कहना है कि विनोद जाखड़ के पदभार ग्रहण समारोह (28 फरवरी) के बाद ही राजस्थान के नए मुखिया के नाम पर मुहर लगेगी। तब तक दिल्ली में दावेदारों की भागदौड़ जारी रहने वाली है।


