F&O Settlement से Trump के फैसले तक, इन 5 वजहों से Stock Market में आ सकता है भूचाल

F&O Settlement से Trump के फैसले तक, इन 5 वजहों से Stock Market में आ सकता है भूचाल

घरेलू वृहद आर्थिक आंकड़ों, मासिक वायदा व विकल्प (एफएंडओ) निपटान और अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुल्कों में की गई बढ़ोतरी से जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों के कारण अगले सप्ताह शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विश्लेषकों ने यह राय जताई है।
विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियां, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मौद्रिक संकेतों से भी बाजार की दिशा तय होगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, आगामी सप्ताह में बाजार के अस्थिर रहने की संभावना है, विशेष रूप से 24 फरवरी को होने वाले मासिक एफएंडओ निपटान के कारण। घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों, विदेशी मुद्रा भंडार और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के उत्पादन के आंकड़ों पर रहेगी।
उन्होंने कहा कि निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश के निहितार्थों का भी आकलन करेंगे, जो व्यापार की स्थिति, शुल्क संरचना और वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। यह घटनाक्रम शुल्कों पर अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले के बाद सामने आया है।

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विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप ने शुक्रवार को अदालत के फैसले के बाद भारत सहित कई देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था और एक दिन बाद इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इससे व्यापारिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रतिकूल प्रभाव की चिंताएं बढ़ गई हैं।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि निवेशक अमेरिका-ईरान संबंधों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मौद्रिक संकेतों पर बारीकी से नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के जीडीपी आंकड़ों का कंपनियों की आय और बाजार की स्थिति पर पड़ने वाले असर को भी गौर से देखा जाएगा।

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पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 187.95 अंक या 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई के निफ्टी में 100.15 अंक या 0.39 प्रतिशत की तेजी रही।
नायर ने कहा, पिछले सप्ताह बाजार की धारणा सतर्कता और उत्साह के बीच झूलती रही। बैंकिंग, वित्तीय, बिजली और चुनिंदा एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने में मदद मिली।
उन्होंने कहा कि एआई से जुड़े बदलावों और मार्जिन दबाव की चिंताओं के कारण आईटी शेयरों में सुस्ती रही। हालांकि, बड़े शेयरों में मजबूती और पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी को लेकर बने उत्साह ने बाजार को सकारात्मक दायरे में बनाए रखा।
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में घरेलू बाजार एक सीमित दायरे में रह सकता है, जहां नकदी का प्रवाह और वैश्विक जोखिम धारणा बाजार के लिए मुख्य कारक साबित होंगे।

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