शहरी क्षेत्रों में फैमिली आईडी के सिर्फ 27% आवेदन स्वीकृत:ग्रामीण क्षेत्रों में योजना ने पकड़ी रफ्तार, विशेष अभियान की तैयारी

शहरी क्षेत्रों में फैमिली आईडी के सिर्फ 27% आवेदन स्वीकृत:ग्रामीण क्षेत्रों में योजना ने पकड़ी रफ्तार, विशेष अभियान की तैयारी

जनपद में फैमिली आईडी योजना शहरी क्षेत्रों में धीमी गति से चल रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसने रफ्तार पकड़ी है। निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में केवल 27 प्रतिशत आवेदन ही स्वीकृत हो पाए हैं, जो चिंता का विषय है। जिले में कुल 72,211 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 55,297 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो लगभग 76 प्रतिशत है। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में 3,000 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 803 आवेदन ही स्वीकृत हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के प्रति जागरूकता और सक्रियता के कारण संतोषजनक प्रगति हुई है। वहीं, शहरी इलाकों में योजना की जानकारी का अभाव या क्रियान्वयन स्तर पर अपेक्षित प्रयासों की कमी को धीमी गति का मुख्य कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल सुविधाओं के बावजूद जनसंपर्क और शिविरों की कमी एक बड़ी वजह है। फैमिली आईडी योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं से सीधे और पारदर्शी तरीके से जोड़ना है। इसके माध्यम से परिवार अपनी पात्रता जान सकते हैं, और संबंधित विभाग स्वयं संपर्क कर प्रक्रिया पूरी करता है। कई मामलों में स्वतः नामांकन की सुविधा भी उपलब्ध है। फैमिली आईडी के डेटा के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है, जिससे लाभार्थियों को समय पर प्रमाणपत्र और योजनाओं का लाभ मिल पाता है। यह परिवारों को प्राप्त सभी सरकारी लाभों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी बी.एस. यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हुई है। शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और आवेदन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत वार्ड स्तर पर कैंप आयोजित किए जाएंगे और लंबित मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाएगा। शहरी इलाकों में कम प्रगति प्रशासन के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते विशेष रणनीति नहीं अपनाई गई तो कई पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं। अब नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित वार्ड स्तरीय शिविर कितनी तेजी से तस्वीर बदल पाते हैं।

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