5 Family Member Died Together: भावनगर गांव ने रविवार को ऐसा दिन देखा, जिसमें हर आंख नम थी। वहां सूर्य तो उगा, लेकिन वह गम के सागर में डूबा था। गांव में केवल सिसकियां गूंज रही थी। गांव के 200 घरों में चूल्हे ठंडे पड़े थे। किसी आंगन से धुआं नहीं उठा, किसी घर में रोटी नहीं बनी। हर गली, हर चौखट पर बस एक ही सवाल था, हे भगवान, एक साथ पूरा परिवार क्यों?

रामलाल के घर के बाहर ग्रामीणों का हुजूम था।
महिलाएं-पुरुष विलाप कर रहे थे। दादी, पोता, बेटा, बेटी सहित पांच जनों की अर्थी एक साथ उठी तो ऐसा लगा मानो गांव में जीवन सूख गया है। श्मशान की ओर बढ़ता हर कदम भारी था, हर कंधा बोझ से नहीं, गम से झुका था। वहां मां-बेटे कोमल व आयुष (4) (रामलाल की बेटी व दोहिता) को एक व मां मथुरा देवी, बेटे रामलाल व पोते कैलाश को एक चिता पर लिटाकर अग्नि संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार में गांव के साथ साळी, सुंदेलाव, गुड़ा प्रतापसिंह, मणिहारी आदि गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे और रामलाल के परिजनों को ढांढस बधाई। गांव में पाली उपखंड अधिकारी विमलेंद्र सिंह राणावत, अमरसिंह रतनू, नायब तहसीलदार बाबूलाल, आरआई चक्रवती सिंह ने भी परिजनों को हिम्मत बंधाई।
सिर्फ फोटो से पहचानेंगे ऐसे थे मां-पापा
जीवन के महज दो बसंत देखने वाले नरेश के पिता और पांच साल की जाह्नवी की मां उनकी अंगुली छोड़कर दुनिया से रुखसत हो गए। ये मासूम अस्पताल में भर्ती हैं। उसके साथ कैलाश की पत्नी ममता, रामलाल की पत्नी पकली देवी, बेटा राकेश भी भर्ती हैं। उनको यह नहीं पता है कि कैलाश व रामलाल उनको दुनिया में अकेला छोड़कर चले गए हैं।

रामलाल के जंवाई मदनलाल की जीवन संगनी कोमल और बेटा आयुष उससे व पांच साल की बेटी जाह्नवी से हमेशा के लिए दूर जा चुकी है। मासूमों को तो अपने माता-पिता की सूरत भी याद नहीं रहेगी। वे केवल उनको फोटो देखकर ही पहचान सकेंगे। उधर, गांव में रामलाल के बड़े भाई दयाराम व छोटे भाई दूदाराम के आंखों से आंसू नहीं थम रहे।
मदनलाल चला रहा था वाहन
मृतकों के परिजन अशोक कुमावत ने बताया कि दयाराम, रामलाल व दूदाराम सभी अहमदाबाद में रहते थे। इनमें से दो भाइयों के किराणे व छोटे भाई के चक्की की दुकान है। ये तीनों भाई अपनी बहन के बेटे विकास की शादी में शामिल होने के लिए मणिहारी आए थे। वहां 20 फरवरी को बड़ी बंदोली व 21 को ब्याह था।

इनके दूसरी बहन के लड़के का विवाह अहमदाबाद में था। उसकी बड़ी बंदोली 21 फरवरी व विवाह 22 फरवरी को था। इस पर रामलाल व दयाराम 20 फरवरी को मणिहारी से भाव नगर गांव आए और रात में अहमदाबाद के लिए दो वाहनों से रवाना हुए। दयाराम के परिवार का वाहन आगे व पीछे रामलाल के परिवार का वाहन था। जिसे रामलाल का जंवाई मदनलाल चला रहा था और हादसा हो गया।

दूदाराम रुका था मणिहारी
जब रामलाल व दयाराम का परिवार मणिहारी गांव से भावनगर गांव आया तो दूदाराम का परिवार बहन के घर पर रुक गया था। उनको भाई के हादसे में मरने की खबर मिली तो खुशियां गम में बदल गई। वह उसी समय भावनगर गांव पहुंचा। परिजनों के शव गांव आने पर उसके साथ सभी परिजनों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। जो अंतिम संस्कार के बाद भी नहीं थमी।


