बिहार राज्यसभा चुनाव: एनडीए में किसके नाम खुलेगा पत्ता, क्या कुशवाहा की जगह लेंगे पवन सिंह?

बिहार राज्यसभा चुनाव: एनडीए में किसके नाम खुलेगा पत्ता, क्या कुशवाहा की जगह लेंगे पवन सिंह?

राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार में हलचल तेज हो गई है। उपेंद्र कुशवाहा अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। जबकि पवन सिंह रेस में आगे चल रहे हैं। सबकी नजर हम प्रमुख जीतन राम मांझी पर है। 

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव की घोषणा के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष में हलचल तेज है। दोनों की नजर पांचवी सीट पर है। बिहार विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के हिसाब से 4 राज्यसभा सीटें तो एनडीए आसानी से जीत जायेगी। लेकिन पांचवी सीट जीतने के लिए 3 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत पड़ेगी। इधर, राज्य सभा चुनाव में ओवैसी की एंट्री से महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई है। इस बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पांचवी सीट पर अपना दावा करते हुए सियासी तापमान बढ़ा दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी के कई विधायक संपर्क में हैं। इनकी मदद से अस दफा एनडीए पांचव में पांच सीट जीत रही है।

विपक्ष प्रत्याशी नहीं उतारेगा

उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया कि सभी पांच सीट पर एनडीए के ही प्रत्याशी अपना नामांकन करेंगे। विपक्ष पोल खुलने के डर से अपना कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारेगा। उनका इशारा क्रॉस वोटिंग की ओर था। इधर, एनडीए में पांचवी सीट को लेकर मारामारी शुरू हो गया है। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए अपना दावा प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार विधान सभा चुनाव में वादा किया गया था कि एक एमएलसी और एक राज्य सभा का भी सीट दिया जायेगा। मुझे उम्मीद है बीजेपी अपना वादा जरूर निभायेगी।

क्यों दावा कर रहे उपेंद्र

सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के जरिए बीजेपी- जदयू इस बार जातीय संतुलन ठीक करने का प्रयास करेगी। बीजेपी नीतीश कैबिनेट में सवर्णों की उपेक्षा को राज्य सभा में ठीक करने का प्रयास करना चाह रही है। कहा जा रहा है कि इसकी वजह से उपेंद्र कुशवाहा का दावा कमजोर और पवन सिंह का दावा मजबूत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी ब्राह्मण और राजपूत नेता के नाम पर मंथन कर रही है। यही कारण है कि उपेंद्र कुशवाहा संवाददाता सम्मेलन कर के बीजेपी को उसका वादा याद दिला रहे हैं।

05 सांसदों का खत्म हो रहा कार्यकाल

बिहार से राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं। इनमें से पांच सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होने हैं। जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह एवं रामनाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता एवं अमरेंद्र धारी सिंह का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है। इनका कार्यकाल खत्म होने की वजह से इन सीटों पर फिर से चुनाव हो रहे हैं।

6 विधायकों की जरूरत

बिहार विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। इसमें 25 आरजेडी, 06 कांग्रेस, सीपीआई-एमएल के 2, सीपीएम और आईआईपी के 1-1 इस प्रकार कुल 35 विधायक होते हैं। राज्य सभा के एक सीट को जीतने के लिए 41 सदस्यों की जरूरत है। ऐसे में महागठबंधन को राज्यसभा चुनाव का एक सीट जीतने के लिए 5 विधायकों वाली एआईएमआईएम और बसपा के एक विधायक का समर्थन की जरूरत है। राज्यसभा चुनाव के गणित के तहत बिहार में एक विधायक के वोट का मूल्य 100 होता है। इस तरह एक सीट जीतने के लिए 40.5 विधायकों के मतों की आवश्यकता होती है, जिसे पूर्णांक में 41 माना जाता है।

  

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