सिपाही भर्ती-एक माह में 30 से ज्यादा फर्जी अभ्यर्थी पकड़ाए:धांधली के लिए 2.50 लाख रुपए तक दिए; बायोमेट्रिक सुपरवाइजर, केंद्र के कर्मियों पर मिलिभगत का आरोप

सिपाही भर्ती-एक माह में 30 से ज्यादा फर्जी अभ्यर्थी पकड़ाए:धांधली के लिए 2.50 लाख रुपए तक दिए; बायोमेट्रिक सुपरवाइजर, केंद्र के कर्मियों पर मिलिभगत का आरोप

केंद्रीय चयन पर्षद की ओर से आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका है। लिखित परीक्षा के बाद पटना के शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह उच्च विद्यालय में चल रहे फिजिकल टेस्ट के दौरान पिछले एक महीने में 30 से अधिक वैसे अभ्यर्थी पकड़े गए हैं। जिन्होंने लिखित परीक्षा में अपनी जगह स्कॉलर बिठाए थे। फिजिकल टेस्ट के दौरान बायोमेट्रिक मैच नहीं होने के कारण एक-एक करके सभी पकड़े जा रहे हैं। इसमें से बहुत सारे अभ्यर्थियों ने पुलिस की पूछताछ में धांधली के पैटर्न के बारे में भी बताया है। कैसे सेंटर पर सेटिंग हुई थी, कितने रुपए में बात बनी थी। सारी चीजों के बारे में जानकारी दी है, ये सारी जानकारी दी है। फिलहाल डीएसपी रैंक के पदाधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं। जिस तरीके से अभ्यर्थी पकड़े जा रहे हैं। सेंटर के लगभग कर्मियों की मिली भगत भी सामने आई है। जिसने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। सेंटर पर हुई 2.50 लाख में सेटिंग 19 फरवरी को शहीद राजेंद्र सिंह उच्च विद्यालय (पटना हाई स्कूल) में उत्तर प्रदेश का एक अभ्यर्थी पहुंचा था। जिसका नाम रितेश सिंह(रौल नं-3012020204) है। जब फिजिकल टेस्ट के दौरान फिंगरप्रिंट्स मैच कराए गए, तो बायोमेट्रिक से मैच नहीं हो पाया। इसके बाद इसे पकड़ लिया गया। जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि 250000 रुपए में सेटिंग करके लिखित परीक्षा पास की थी। इस तरीके का रहा पैटर्न उसने बताया कि 20 जुलाई 2025 को करीब 8 बजे अपने परीक्षा केन्द्र मानव भारती नेशनल स्कूल, गया पहुंचा था। परीक्षा केन्द्र पर ही मुलकात एक सावले रंग के व्यक्ति (बिचौलिया नाम पता मालूम नहीं) से हुई। जो करीब 30 वर्ष का था। बिचौलिया ने कहा, परीक्षा केन्द्र के अंदर उसकी सेटिंग है। अगर ये उसे 2.50 लाख रुपए देंगे तो सिपाही भर्ती विज्ञापन संख्या-01/25 की लिखित परीक्षा में पास करवा देगा। इसके बाद रितेश राजी हो गया। बिचौलिया ने 2,50000/- (दो लाख पचास हजार) रुपए लेकर लिखित परीक्षा पास करवाने की बात की। इसके बाद गया के पिपरा के रहने वाले इंपर्सनेटर धनंजय कुमार से मुलाकात कराई। फिर बायोमेट्रिक सुपरवाइजर विकास कुमार और संतोष कुमार की मिली भगत से धनंजय कुमार परीक्षा हॉल के अंदर जाकर बैठ गया। इसके बाद बायोमेट्रिक ऑपरेटर रवि कुमार ने परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे रितेश सिंह की तस्वीर लेकर सबमिट कर दी। धनंजय कुमार स्कॉलर के तौर पर रितेश की जगह बैठा और लिखित परीक्षा में पास कर दिया। मोनू दो लोगों की जगह पर स्कॉलर के तौर पर बैठा फिजिकल टेस्ट के दौरान पकड़ा गया फर्जी अभ्यर्थी मीनू सौरभ (रोल नंबर: 1537120185) ने पकड़े जाने के बाद पूछताछ में बताया कि मोररका कॉलेज, सुल्तानगंज, जिला-भालगपुर के पास कमरा लेकर पढ़ाई करता था। इसी दौरान मो. कौशर आलम और मो. कौशर अली से मुलाकात हुई। फिजिकल के दौरान बायोमेट्रिक मैच न होने पर पकड़ाया उनसे बातचीत के बाद लिखित परीक्षा में रुपए लेकर सेटिंग की भी बात फाइनल हुई। इंपर्सनेटर के तौर पर दोनों की जगह पर बैठा और इसकी एवज में एडवांस के तौर पर 10,000 रुपए लिए। स्कॉलर के तौर पर सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह बैठा था। फिजिकल टेस्ट के दौरान जब बायोमेट्रिक मैच नहीं किया तो इस बात का खुलासा हुआ। गौरतलब है कि मोनू और रितेश की तरह 30 से अधिक अभ्यर्थियों की इसी तरीके की कहानी सामने आई है। जिसमें उनकी जगह स्कॉलर बैठे थे। फिलहाल जो जांच चल रही है वह किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है। शहीद राजेंद्र सिंह कॉलेज से जो फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए हैं। उसमें कमोबेश सभी जिले के शामिल हैं। केंद्रीय चयन पर्षद की ओर से आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका है। लिखित परीक्षा के बाद पटना के शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह उच्च विद्यालय में चल रहे फिजिकल टेस्ट के दौरान पिछले एक महीने में 30 से अधिक वैसे अभ्यर्थी पकड़े गए हैं। जिन्होंने लिखित परीक्षा में अपनी जगह स्कॉलर बिठाए थे। फिजिकल टेस्ट के दौरान बायोमेट्रिक मैच नहीं होने के कारण एक-एक करके सभी पकड़े जा रहे हैं। इसमें से बहुत सारे अभ्यर्थियों ने पुलिस की पूछताछ में धांधली के पैटर्न के बारे में भी बताया है। कैसे सेंटर पर सेटिंग हुई थी, कितने रुपए में बात बनी थी। सारी चीजों के बारे में जानकारी दी है, ये सारी जानकारी दी है। फिलहाल डीएसपी रैंक के पदाधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं। जिस तरीके से अभ्यर्थी पकड़े जा रहे हैं। सेंटर के लगभग कर्मियों की मिली भगत भी सामने आई है। जिसने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। सेंटर पर हुई 2.50 लाख में सेटिंग 19 फरवरी को शहीद राजेंद्र सिंह उच्च विद्यालय (पटना हाई स्कूल) में उत्तर प्रदेश का एक अभ्यर्थी पहुंचा था। जिसका नाम रितेश सिंह(रौल नं-3012020204) है। जब फिजिकल टेस्ट के दौरान फिंगरप्रिंट्स मैच कराए गए, तो बायोमेट्रिक से मैच नहीं हो पाया। इसके बाद इसे पकड़ लिया गया। जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि 250000 रुपए में सेटिंग करके लिखित परीक्षा पास की थी। इस तरीके का रहा पैटर्न उसने बताया कि 20 जुलाई 2025 को करीब 8 बजे अपने परीक्षा केन्द्र मानव भारती नेशनल स्कूल, गया पहुंचा था। परीक्षा केन्द्र पर ही मुलकात एक सावले रंग के व्यक्ति (बिचौलिया नाम पता मालूम नहीं) से हुई। जो करीब 30 वर्ष का था। बिचौलिया ने कहा, परीक्षा केन्द्र के अंदर उसकी सेटिंग है। अगर ये उसे 2.50 लाख रुपए देंगे तो सिपाही भर्ती विज्ञापन संख्या-01/25 की लिखित परीक्षा में पास करवा देगा। इसके बाद रितेश राजी हो गया। बिचौलिया ने 2,50000/- (दो लाख पचास हजार) रुपए लेकर लिखित परीक्षा पास करवाने की बात की। इसके बाद गया के पिपरा के रहने वाले इंपर्सनेटर धनंजय कुमार से मुलाकात कराई। फिर बायोमेट्रिक सुपरवाइजर विकास कुमार और संतोष कुमार की मिली भगत से धनंजय कुमार परीक्षा हॉल के अंदर जाकर बैठ गया। इसके बाद बायोमेट्रिक ऑपरेटर रवि कुमार ने परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे रितेश सिंह की तस्वीर लेकर सबमिट कर दी। धनंजय कुमार स्कॉलर के तौर पर रितेश की जगह बैठा और लिखित परीक्षा में पास कर दिया। मोनू दो लोगों की जगह पर स्कॉलर के तौर पर बैठा फिजिकल टेस्ट के दौरान पकड़ा गया फर्जी अभ्यर्थी मीनू सौरभ (रोल नंबर: 1537120185) ने पकड़े जाने के बाद पूछताछ में बताया कि मोररका कॉलेज, सुल्तानगंज, जिला-भालगपुर के पास कमरा लेकर पढ़ाई करता था। इसी दौरान मो. कौशर आलम और मो. कौशर अली से मुलाकात हुई। फिजिकल के दौरान बायोमेट्रिक मैच न होने पर पकड़ाया उनसे बातचीत के बाद लिखित परीक्षा में रुपए लेकर सेटिंग की भी बात फाइनल हुई। इंपर्सनेटर के तौर पर दोनों की जगह पर बैठा और इसकी एवज में एडवांस के तौर पर 10,000 रुपए लिए। स्कॉलर के तौर पर सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह बैठा था। फिजिकल टेस्ट के दौरान जब बायोमेट्रिक मैच नहीं किया तो इस बात का खुलासा हुआ। गौरतलब है कि मोनू और रितेश की तरह 30 से अधिक अभ्यर्थियों की इसी तरीके की कहानी सामने आई है। जिसमें उनकी जगह स्कॉलर बैठे थे। फिलहाल जो जांच चल रही है वह किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है। शहीद राजेंद्र सिंह कॉलेज से जो फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए हैं। उसमें कमोबेश सभी जिले के शामिल हैं।  

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