अल्पसंख्यक बजट पर AIMIM का महागठबंधन पर हमला:मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल, आदिल हसन बोले-सिर्फ गाली देना जानते है नेता

अल्पसंख्यक बजट पर AIMIM का महागठबंधन पर हमला:मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल, आदिल हसन बोले-सिर्फ गाली देना जानते है नेता

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने अल्पसंख्यक कल्याण बजट में कम राशि पेश होने के मामले पर महागठबंधन के मुस्लिम नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद और कांग्रेस के सभी मुस्लिम नेता इस बजट पर खामोश रहे। आदिल हसन ने कहा कि शुक्रवार को विधान परिषद में अल्पसंख्यक बजट पर इन नेताओं ने सवाल न पूछकर और आवाज न उठाकर समुदाय को धोखा दिया है। उन्होंने अब्दुल बारिक सिद्दीकी और कारी शोएब जैसे नेताओं का नाम लेते हुए दावा किया कि जब भी पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का मुद्दा आता है, तो केवल मजलिस ही मजबूती से खड़ी होती है। नेताओं से सवाल पूछने का किया आह्वान हसन ने सभी पार्टियों के नेताओं से सवाल पूछने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के वोट से जीतने वाले अन्य दलों के नेताओं से भी सवाल पूछे जाने चाहिए, जो उनके मुद्दों पर कुछ नहीं करते। उन्होंने तथ्यों के आधार पर और जिम्मेदारी के साथ सवाल उठाने पर जोर दिया। आदिल हसन ने आरोप लगाया कि ये नेता केवल एआईएमआईएम को गाली देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही वे एआईएमआईएम की आलोचना करें, लेकिन उन्हें सदन में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को भी उठाना चाहिए। हसन ने जोर दिया कि जब वे अल्पसंख्यकों से वोट लेते हैं, तो उनके हितों के लिए सदन में बोलना भी उनकी जिम्मेदारी है। इसके विपरीत, आदिल हसन ने दावा किया कि एआईएमआईएम के सभी पांचों विधायकों ने, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान भी शामिल हैं, सदन में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कटाव, शिक्षा और अन्य संबंधित मामलों पर अल्पसंख्यकों के हित में आवाज बुलंद की है। अल्पसंख्यकों का वोट लेना जानते है नेता हसन ने राजद और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जबकि जमाखान जैसे मुस्लिम मंत्री सरकार में होने के कारण कुछ नहीं बोल सकते, राजद और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं की खामोशी समझ से परे है। हसन के अनुसार, ये नेता केवल अल्पसंख्यकों का वोट लेना जानते हैं। आदिल हसन के इस बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महागठबंधन के नेताओं से अब प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है. विपक्षी दलों पर यह गंभीर आरोप है कि वे अल्पसंख्यकों के वोट तो लेते हैं, लेकिन उनके मुद्दों पर सदन में आवाज नहीं उठाते. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने अल्पसंख्यक कल्याण बजट में कम राशि पेश होने के मामले पर महागठबंधन के मुस्लिम नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद और कांग्रेस के सभी मुस्लिम नेता इस बजट पर खामोश रहे। आदिल हसन ने कहा कि शुक्रवार को विधान परिषद में अल्पसंख्यक बजट पर इन नेताओं ने सवाल न पूछकर और आवाज न उठाकर समुदाय को धोखा दिया है। उन्होंने अब्दुल बारिक सिद्दीकी और कारी शोएब जैसे नेताओं का नाम लेते हुए दावा किया कि जब भी पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का मुद्दा आता है, तो केवल मजलिस ही मजबूती से खड़ी होती है। नेताओं से सवाल पूछने का किया आह्वान हसन ने सभी पार्टियों के नेताओं से सवाल पूछने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के वोट से जीतने वाले अन्य दलों के नेताओं से भी सवाल पूछे जाने चाहिए, जो उनके मुद्दों पर कुछ नहीं करते। उन्होंने तथ्यों के आधार पर और जिम्मेदारी के साथ सवाल उठाने पर जोर दिया। आदिल हसन ने आरोप लगाया कि ये नेता केवल एआईएमआईएम को गाली देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही वे एआईएमआईएम की आलोचना करें, लेकिन उन्हें सदन में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को भी उठाना चाहिए। हसन ने जोर दिया कि जब वे अल्पसंख्यकों से वोट लेते हैं, तो उनके हितों के लिए सदन में बोलना भी उनकी जिम्मेदारी है। इसके विपरीत, आदिल हसन ने दावा किया कि एआईएमआईएम के सभी पांचों विधायकों ने, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान भी शामिल हैं, सदन में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कटाव, शिक्षा और अन्य संबंधित मामलों पर अल्पसंख्यकों के हित में आवाज बुलंद की है। अल्पसंख्यकों का वोट लेना जानते है नेता हसन ने राजद और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जबकि जमाखान जैसे मुस्लिम मंत्री सरकार में होने के कारण कुछ नहीं बोल सकते, राजद और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं की खामोशी समझ से परे है। हसन के अनुसार, ये नेता केवल अल्पसंख्यकों का वोट लेना जानते हैं। आदिल हसन के इस बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महागठबंधन के नेताओं से अब प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है. विपक्षी दलों पर यह गंभीर आरोप है कि वे अल्पसंख्यकों के वोट तो लेते हैं, लेकिन उनके मुद्दों पर सदन में आवाज नहीं उठाते.  

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