मटुकनाथ बोले- सेक्स सहज..माहौल मिले तो राम तक की यात्रा:गलत इस्तेमाल से क्राइम बन जाता है; कहा- अब जूली की याद नहीं आती

मटुकनाथ बोले- सेक्स सहज..माहौल मिले तो राम तक की यात्रा:गलत इस्तेमाल से क्राइम बन जाता है; कहा- अब जूली की याद नहीं आती

एक वक्त था जब पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी का नाम सुर्खियों में रहता था। साल 2006 में उनकी और जूली की लव स्टोरी काफी चर्चा में रही थी। जूली उनकी स्टूडेंट थीं। इस रिश्ते के सार्वजनिक होने के बाद मटुकनाथ को ‘लव गुरु’ कहा जाने लगा। हालांकि, जूली की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने अचानक मीडिया से दूरी बना ली थी। अब एक बार फिर मटुकनाथ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं। वे लगातार पोस्ट साझा कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ‘लव, सेक्स और क्राइम’ विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, “लव-सेक्स और क्राइम। सेक्स सहज है, प्राकृतिक है और सुंदर है, लेकिन इसका गलत ढंग से इस्तेमाल हो तो क्राइम बन जाता है। जबकि माहौल मिले तो राम तक यात्रा की जा सकती है।” मटुकनाथ का पूरा पोस्ट पढ़िए… एक लड़का और एक लड़की सेक्स संबंधी बातें करना चाहते हैं। वे सेक्स करना चाहते हैं। यहां परिवार, शिक्षालय और समाज का इतना ही कर्तव्य है कि इसके संबंध में पर्याप्त जानकारी और सावधानियां उन दोनों तक पहुंचाकर उन्हें स्वतंत्र छोड़ दें, लेकिन ऐसा नहीं होता। इसे गलत, खतरनाक और अनैतिक बताकर उन्हें इस दिशा में बढ़ने से रोक दिया जाता है। वे इस रोक के पीछे का कारण नहीं जानते। रोकना कितना गलत, अनैतिक और अप्राकृतिक है, यह भी नहीं जानते। वे तो बस इतना जानते हैं कि समाज इसे गलत कहता है। समाज इसे गलत क्यों कहता है, यह किसी को मालूम नहीं। वे आगे लिखते हैं- अगर सेक्स के सुख को बढ़ाना है तो उसे प्रेम में बदलने का वातावरण बनाइए। और आगे का आनंद चाहते हैं तो प्रेम को भक्ति में बदलने की परिस्थिति बनने दीजिए। काम ‘राम’ तक की यात्रा बन सकता है, लेकिन हो इसका उलटा रहा है। काम दुष्काम बन रहा है, नीचता की पराकाष्ठा को छू रहा है। इसका कारण सिर्फ एक है- काम के प्रति अज्ञान। अब जानिए मटुकनाथ कौन हैं और उनकी और जूली की लव स्टोरी क्या है मटुकनाथ-जूली की प्रेम कहानी 2004 में चर्चा में आई थी। मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी में हिन्दी के प्रोफेसर थे और जूली उनकी स्टूडेंट थी। दोनों की उम्र में 30 साल का अंतर था। मटुकनाथ के मुताबिक, जूली ने ही उन्हें प्रपोज किया था, फिर दोनों लिव इन में रहने लगे थे। जूली के साथ प्रेम-प्रसंग की वजह से 15 जुलाई, 2006 को पटना यूनिवर्सिटी ने मटुकनाथ को बीएन कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के रीडर पद से सस्पेंड कर दिया था। बाद में 20 जुलाई, 2009 को उन्हें नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, जूली से अफेयर के बाद मटुकनाथ की पत्नी आभा से तलाक हो गया था। फिलहाल, 72 साल के मटुकनाथ बिहार के भागलपुर नवगछिया में एक स्कूल चलाते हैं। अध्यात्म की तलाश में बढ़ी मटुकनाथ से जूली की दूरी जूली इस वक्त पोर्ट ऑफ स्पेन में हैं। वह वहां एक बुजुर्ग के साथ रहती हैं। अध्यात्म और व्यवसाय से जुड़े वृद्ध ही जूली का खर्च उठाते हैं। मटुकनाथ बताते हैं कि प्रेम में आने के बाद भी शुरू से जूली अध्यात्म और साधना के प्रति आकर्षित होती रहीं। साल 2013 तक तो सबकुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन साधना के लिए गुरु की तलाश में वह भटक गईं। मटुकनाथ और जूली के बीच दूरी 2014 से बढ़ने लगी। अपनी आधी उम्र की लड़की से प्यार करने वाले मटुकनाथ को जूली की साधना पसंद नहीं आई जिससे दूरियां खाई बनती गईं। इसके बाद जूली सात समंदर पार पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंच गईं। ‘ अब जूली की यादों से मुझे छुटकारा मिल चुका है’ मुटकनाथ बताते हैं कि मुझे जूली की यादों से छुटकारा मिल चुका है, मैं किसी को याद नहीं करता हूं। अगर याद भी करता हूं तो आनंद से ही करता हूं, पीड़ा में रहकर याद नहीं करता हूं। समय-समय पर कभी कोई बात छिड़ता है तो उनकी बात होती है। उनके साथ कई बेहतरीन पल रहे हैं, दिल छूने वाली कई यादें हैं। जब तक साथ रहे, हम लोग चमकते ही रहे। हां, हमारे बीच बहस भी होती थी। एक दूसरे से नाराज भी होते थे, एक दूसरे पर गुस्सा भी करते थे, लेकिन प्यार में ये सब जरूरी होता है। मीडिया में जूली की जो बीमार होने वाली तस्वीर वायरल होती है, वो पुरानी है, यूजर्स उसे बार-बार दोहराते हैं, ये 2020 की बातें है। जब मैं ये खबरें देखता हूं तो परेशानी होती है, क्योंकि मुझे अभी भी सोशल मीडिया पर लोग गालियां देते हैं, श्राप देते हैं। स्वाभाविक है कि बुरा लगता है, क्योंकि इन सभी बातों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं था, उनका मन था, वो चली गईं। ‘स्टूडेंट्स जब प्यार में फंसते हैं, तो मुझसे टिप्स लेते हैं’ मटुकनाथ कहते हैं कि मेरी प्रेम कहानी जब शुरू हुई, सबके सामने आई। जब खत्म हुई, तब भी लोगों को पता चला, लेकिन कभी किसी ने मुझसे सवाल नहीं पूछा। मैं शुरु में बीए, एमए के छात्रों को पढ़ाता था, अब बच्चों को पढ़ाता हूं। कई बच्चे ऐसे हैं, जिनका उस वक्त जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन बच्चों ने कभी मुझसे मेरी प्रेम कहानी नहीं पूछी। इन बच्चों से प्रेम कहानी शेयर करने का कोई मतलब भी नहीं है। हां, पटना यूनिवर्सिटी में कभी कोई छात्र प्यार में मामले में फंस जाता था, तो मेरे पास आता था, तब मैं उसके हिसाब से उसे टिप्स भी देता था। जूली से पहली मुलाकात के सवाल पर मटुकनाथ कहते हैं कि ये सभी को पता है। साल 2004 में पहली मुलाकात हुई, एक-दूसरे से परिचय हुआ, दोस्ती हुई, एक-दूसरे की पसंदगी हुई और धीरे-धीरे हम लोग एक-दूसरे के विचारों से प्रभावित हुए और एक-दूसरे के पास आते गए और अंत में वही कहानी प्रेम में बदल गई। एक वक्त था जब पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी का नाम सुर्खियों में रहता था। साल 2006 में उनकी और जूली की लव स्टोरी काफी चर्चा में रही थी। जूली उनकी स्टूडेंट थीं। इस रिश्ते के सार्वजनिक होने के बाद मटुकनाथ को ‘लव गुरु’ कहा जाने लगा। हालांकि, जूली की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने अचानक मीडिया से दूरी बना ली थी। अब एक बार फिर मटुकनाथ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं। वे लगातार पोस्ट साझा कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ‘लव, सेक्स और क्राइम’ विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, “लव-सेक्स और क्राइम। सेक्स सहज है, प्राकृतिक है और सुंदर है, लेकिन इसका गलत ढंग से इस्तेमाल हो तो क्राइम बन जाता है। जबकि माहौल मिले तो राम तक यात्रा की जा सकती है।” मटुकनाथ का पूरा पोस्ट पढ़िए… एक लड़का और एक लड़की सेक्स संबंधी बातें करना चाहते हैं। वे सेक्स करना चाहते हैं। यहां परिवार, शिक्षालय और समाज का इतना ही कर्तव्य है कि इसके संबंध में पर्याप्त जानकारी और सावधानियां उन दोनों तक पहुंचाकर उन्हें स्वतंत्र छोड़ दें, लेकिन ऐसा नहीं होता। इसे गलत, खतरनाक और अनैतिक बताकर उन्हें इस दिशा में बढ़ने से रोक दिया जाता है। वे इस रोक के पीछे का कारण नहीं जानते। रोकना कितना गलत, अनैतिक और अप्राकृतिक है, यह भी नहीं जानते। वे तो बस इतना जानते हैं कि समाज इसे गलत कहता है। समाज इसे गलत क्यों कहता है, यह किसी को मालूम नहीं। वे आगे लिखते हैं- अगर सेक्स के सुख को बढ़ाना है तो उसे प्रेम में बदलने का वातावरण बनाइए। और आगे का आनंद चाहते हैं तो प्रेम को भक्ति में बदलने की परिस्थिति बनने दीजिए। काम ‘राम’ तक की यात्रा बन सकता है, लेकिन हो इसका उलटा रहा है। काम दुष्काम बन रहा है, नीचता की पराकाष्ठा को छू रहा है। इसका कारण सिर्फ एक है- काम के प्रति अज्ञान। अब जानिए मटुकनाथ कौन हैं और उनकी और जूली की लव स्टोरी क्या है मटुकनाथ-जूली की प्रेम कहानी 2004 में चर्चा में आई थी। मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी में हिन्दी के प्रोफेसर थे और जूली उनकी स्टूडेंट थी। दोनों की उम्र में 30 साल का अंतर था। मटुकनाथ के मुताबिक, जूली ने ही उन्हें प्रपोज किया था, फिर दोनों लिव इन में रहने लगे थे। जूली के साथ प्रेम-प्रसंग की वजह से 15 जुलाई, 2006 को पटना यूनिवर्सिटी ने मटुकनाथ को बीएन कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के रीडर पद से सस्पेंड कर दिया था। बाद में 20 जुलाई, 2009 को उन्हें नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, जूली से अफेयर के बाद मटुकनाथ की पत्नी आभा से तलाक हो गया था। फिलहाल, 72 साल के मटुकनाथ बिहार के भागलपुर नवगछिया में एक स्कूल चलाते हैं। अध्यात्म की तलाश में बढ़ी मटुकनाथ से जूली की दूरी जूली इस वक्त पोर्ट ऑफ स्पेन में हैं। वह वहां एक बुजुर्ग के साथ रहती हैं। अध्यात्म और व्यवसाय से जुड़े वृद्ध ही जूली का खर्च उठाते हैं। मटुकनाथ बताते हैं कि प्रेम में आने के बाद भी शुरू से जूली अध्यात्म और साधना के प्रति आकर्षित होती रहीं। साल 2013 तक तो सबकुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन साधना के लिए गुरु की तलाश में वह भटक गईं। मटुकनाथ और जूली के बीच दूरी 2014 से बढ़ने लगी। अपनी आधी उम्र की लड़की से प्यार करने वाले मटुकनाथ को जूली की साधना पसंद नहीं आई जिससे दूरियां खाई बनती गईं। इसके बाद जूली सात समंदर पार पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंच गईं। ‘ अब जूली की यादों से मुझे छुटकारा मिल चुका है’ मुटकनाथ बताते हैं कि मुझे जूली की यादों से छुटकारा मिल चुका है, मैं किसी को याद नहीं करता हूं। अगर याद भी करता हूं तो आनंद से ही करता हूं, पीड़ा में रहकर याद नहीं करता हूं। समय-समय पर कभी कोई बात छिड़ता है तो उनकी बात होती है। उनके साथ कई बेहतरीन पल रहे हैं, दिल छूने वाली कई यादें हैं। जब तक साथ रहे, हम लोग चमकते ही रहे। हां, हमारे बीच बहस भी होती थी। एक दूसरे से नाराज भी होते थे, एक दूसरे पर गुस्सा भी करते थे, लेकिन प्यार में ये सब जरूरी होता है। मीडिया में जूली की जो बीमार होने वाली तस्वीर वायरल होती है, वो पुरानी है, यूजर्स उसे बार-बार दोहराते हैं, ये 2020 की बातें है। जब मैं ये खबरें देखता हूं तो परेशानी होती है, क्योंकि मुझे अभी भी सोशल मीडिया पर लोग गालियां देते हैं, श्राप देते हैं। स्वाभाविक है कि बुरा लगता है, क्योंकि इन सभी बातों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं था, उनका मन था, वो चली गईं। ‘स्टूडेंट्स जब प्यार में फंसते हैं, तो मुझसे टिप्स लेते हैं’ मटुकनाथ कहते हैं कि मेरी प्रेम कहानी जब शुरू हुई, सबके सामने आई। जब खत्म हुई, तब भी लोगों को पता चला, लेकिन कभी किसी ने मुझसे सवाल नहीं पूछा। मैं शुरु में बीए, एमए के छात्रों को पढ़ाता था, अब बच्चों को पढ़ाता हूं। कई बच्चे ऐसे हैं, जिनका उस वक्त जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन बच्चों ने कभी मुझसे मेरी प्रेम कहानी नहीं पूछी। इन बच्चों से प्रेम कहानी शेयर करने का कोई मतलब भी नहीं है। हां, पटना यूनिवर्सिटी में कभी कोई छात्र प्यार में मामले में फंस जाता था, तो मेरे पास आता था, तब मैं उसके हिसाब से उसे टिप्स भी देता था। जूली से पहली मुलाकात के सवाल पर मटुकनाथ कहते हैं कि ये सभी को पता है। साल 2004 में पहली मुलाकात हुई, एक-दूसरे से परिचय हुआ, दोस्ती हुई, एक-दूसरे की पसंदगी हुई और धीरे-धीरे हम लोग एक-दूसरे के विचारों से प्रभावित हुए और एक-दूसरे के पास आते गए और अंत में वही कहानी प्रेम में बदल गई।  

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