बांदा में पॉक्सो कोर्ट ने इंजीनियर राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को बच्चों के यौन शोषण और वीडियो बनाकर बेचने के आरोप में शुक्रवार, 20 फरवरी को फांसी की सजा सुनाई। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी को तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक उसका दम न टूट जाए। इसके बाद उन्होंने अपनी कलम की निब तोड़ दी। दैनिक भास्कर को मिले फैसले के कुछ पन्नों में पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज हैं। बच्चों ने बताया कि आरोपी राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती बच्चों को घर बुलाकर उनका यौन शोषण करते थे। वे इन हरकतों का वीडियो बनाकर डार्क वेब और इंटरनेट के जरिए विदेशों में बेचते थे। पीड़ितों में राम भवन का सगा भांजा, मकान मालिक का बेटा और अन्य बच्चे शामिल थे। आरोपी राम भवन 3 से 17 साल के लड़कों के साथ यौन शोषण करता था, जिसमें 3 से 10 साल के बच्चों को वह अधिक निशाना बनाता था। पीड़ितों में 3 साल के तीन बच्चे, 7 से 9 साल के तीन बच्चे, 10 से 15 साल के 21 बच्चे और 16 से 17 साल के तीन बच्चे शामिल थे। राम भवन के भांजे ने कोर्ट में दिए अपने बयान में बताया कि राम भवन और दुर्गावती उसके मामा-मामी हैं। वह चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी में उनके साथ रहता था। भांजे ने बताया कि राम भवन के पास कई मोबाइल, कैमरे और टीवी थे। राम भवन उसे मोबाइल पर गेम खेलने के बहाने बुलाता था। भांजे ने कोर्ट को बताया कि उसके मामा राम भवन ने उसके साथ गलत काम किया और मामी दुर्गावती को भी इसकी जानकारी थी। मामा ने उसके साथ एक साल तक दरिंदगी की। जब पहली बार यह घटना हुई, तब उसकी उम्र केवल 9 साल थी।


