सीयूजी में भारत में हिंदू अध्ययन : धर्म, सभ्यता और विज्ञान विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
वडोदरा. गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजी) के स्वास्थ्य, संस्कृति एवं व्यक्तित्व विकास केंद्र की ओर से भारत में हिंदू अध्ययन : धर्म, सभ्यता और विज्ञान विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आरंभ हुई।
उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अखिल भारतीय संयुक्त संगठन मंत्री लक्ष्मण गुंथा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक देशों की प्राचीन सभ्यताएं समय के साथ विलुप्त हो गईं, लेकिन भारतीय सभ्यता हजारों वर्षों से निरंतर और अमिट बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सहिष्णुता, समन्वयवादी प्रकृति, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भाव तथा आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन ने इसकी जीवंतता को बनाए रखा है। हमारी सभ्यता पर अनेक बार आघात हुए, फिर भी हम अक्षुण्ण बने रहे। उन्होंने गुरुकुल शिक्षा परंपरा को वर्तमान दौर के लिए प्रासंगिक बताया।
सीयूजी के पूर्व कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे मुख्य वक्ता थे। उन्होंने कहा कि हमारी ज्ञान परंपरा हिंदू ज्ञान परंपरा है जिसमें दर्शन, अध्यात्म, विज्ञान और सामाजिक व्यवस्था के विविध आयाम परस्पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय और गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए।
छह देशों के प्रतिनिधि शामिल
सीयूजी केे कुलपति (प्रभारी) प्रो. अतनु भट्टाचार्य ने अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि हमारे पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेशन आवश्यक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के स्थान पर भारतीय ज्ञान धारा शब्द को अधिक उपयुक्त बताया, क्योंकि यह निरंतर प्रवाहित होती रहती है। आयोजन के संयोजक प्रो. अतनु मोहापात्र ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम में अमेरिका, कजाखिस्तान, थाईलैंड और जर्मनी सहित कुल छह देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सीयूजी के कुलसचिव प्रो. एच.बी. पटेल ने स्वागत किया। संगोष्ठी की सारांश पुस्तिका का विमोचन किया गया। सह-संयोजक डॉ. धीरेन्द्र मिश्रा ने धन्यवाद दिया।


