गैस पीड़ितों के सालों पुराने मेडिकल रिकॉर्ड होगा डिजिटल:एक साल में पूरी होगी प्रक्रिया; इलाज और नीति तय करने में मिलेगी सटीक दिशा

गैस पीड़ितों के सालों पुराने मेडिकल रिकॉर्ड होगा डिजिटल:एक साल में पूरी होगी प्रक्रिया; इलाज और नीति तय करने में मिलेगी सटीक दिशा

गैस पीड़ितों की वर्षों पुरानी बीमारियों और इलाज का पूरा रिकॉर्ड अब डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (BMHRC) ने इस दिशा में भारत सरकार के उपक्रम एचएलएल इन्फ्राटेक सर्विसेज लिमिटेड (हाइट्स) के साथ समझौता किया है। तय हुआ है कि एक साल के भीतर गैस पीड़ितों और उनकी आश्रित संतानों के सभी पुराने मेडिकल रिकॉर्ड स्कैन कर अस्पताल के हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) से जोड़े जाएंगे। इससे इलाज, शोध और भविष्य की स्वास्थ्य नीति तय करने में ठोस आधार मिलेगा। एक साल में पूरा होगा डिजिटलीकरण शनिवार को बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव और हाइट्स के मध्य भारत के जोनल हेड एवं एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट प्रेम प्रकाश के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। समझौते के तहत अस्पताल में उपलब्ध सभी गैस पीड़ितों और उनकी आश्रित संतानों के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल प्रारूप में बदला जाएगा। यह पूरा काम एक वर्ष की निर्धारित अवधि में पूरा किया जाएगा। इसके बाद हर मरीज का इलाज इतिहास, जांच रिपोर्ट, दवाओं का विवरण और पूर्व उपचार संबंधी जानकारी सुरक्षित रूप से ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। पांच लाख से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ नई व्यवस्था से भोपाल में रहने वाले करीब पांच लाख गैस पीड़ितों को फायदा मिलेगा। वर्षों से कागजों में सुरक्षित रिकॉर्ड अब डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे, जिससे मरीजों को बार-बार फाइलें लेकर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहल का उद्देश्य गैस पीड़ितों और उनकी आश्रित संतानों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में लिया गया है। इलाज होगा तेज और सटीक मेडिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से उपचार प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी होगी। डॉक्टर कंप्यूटर स्क्रीन पर ही मरीज का पूरा स्वास्थ्य विवरण देख सकेंगे। इससे इलाज के दौरान निर्णय तेजी और सटीकता के साथ लिए जा सकेंगे। इमरजेंसी स्थिति में भी रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध होगा। कागजी फाइलों पर निर्भरता कम होगी और अनावश्यक जांचों की दोहराव से बचाव होगा। इससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी। रिकॉर्ड सुरक्षित, नीति निर्माण में भी मदद डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे, जिससे दस्तावेजों के गुम होने या खराब होने का खतरा समाप्त होगा। लंबे समय से बीमारियों से जूझ रहे गैस पीड़ितों के मामलों का समग्र अध्ययन भी संभव होगा। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और बीएमएचआरसी गैस पीड़ितों को आधुनिक तकनीक आधारित बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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