बिहार में लगातार महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रही हिंसा और उत्पीड़न को लेकर आज कांग्रेस सड़कों पर उतरी है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आज कांग्रेस की महिला विंग आर ब्लॉक से लेकर विधानसभा मार्च करने के लिए निकली थी लेकिन उन्हें पुलिस द्वारा रोक दिया गया। हाथों में बैनर पोस्टर लिए सभी महिलाएं सड़क पर उतरी हुई थी। बलात्कार पर चुप्पी क्यों, नीतीश मोदी शर्म करो, महिला हिंसा पर हल्ला बोल, जैसे नारे लगाए जा रहे थे। घर से निकलने में भी डर लगता- जन्नत प्रवीण प्रदर्शन में शामिल जन्नत प्रवीण नाम की महिला ने कहा कि, ‘हम लोग महिला सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं। बिहार में महिला बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। आजकल हमें घर से निकलने में भी डर लगता है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘कुछ माता-पिता ने तो अपने बच्चियों का घर से निकलना ही बंद कर दिया है और उनकी पढ़ाई लिखाई भी रोक दी है। कई लड़कियों की तो शादी करवा दी गई है। अगर महिलाएं सुरक्षित होती तो हमें सड़क पर आज उतरना नहीं पड़ता। महिलाएं सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है।’ हाथों में नीतीश-मोदी शर्म करो के पोस्टर लिए खड़ी हैं महिलाएं महिलाओं ने कहा कि, ‘हम इस पोस्टर के माध्यम से यह दिखाना चाहते हैं कि अब तो दोनों शर्म कर लें। बिहार में महिलाओं का रेप अब आम बात हो गया है। जो यह कहते हैं कि नीतीश सरकार ने बिहार में महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है, उसके लिए यह तमाचा है।’ सम्राट दो-दो पद लेकर बैठे, एक का भी काम नहीं कर रहे- महिलाएं प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि नीट छात्रा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही है कि उसके साथ बलात्कार हुआ है, लेकिन डीजीपी पीड़िता की मां को इस बात से नकार कर रही है। सम्राट चौधरी दो-दो पद लेकर बैठे हैं, लेकिन एक पद का भी काम नहीं कर रहे हैं। कुछ वर्षों से बिहार में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी- विवेक कुमार प्रदर्शन में शामिल विवेक कुमार ने कहा कि, ‘सरकार हमेशा से जनता की आवाज को दबाती रही है। पिछले कुछ वर्षों से बिहार में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी है। चुनाव के दौरान बिहार में महिलाएं ही मुद्दा थी, लेकिन इसके बावजूद महिला के खिलाफ हिंसा में कोई कमी नहीं आ रही है।’ उनका मानना है कि, ‘महिला के प्रति अत्याचार कम नहीं हुई है और इसी को लेकर आज हम सड़क पर उतरे हुए हैं। आखिर सुप्रीम कोर्ट का गाइडलाइंस जारी होने के बावजूद भी महिला कॉलेज, स्कूल या ऑफिस में यह गाइडलाइंस लागू क्यों नहीं हुई है।’ बिहार में लगातार महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रही हिंसा और उत्पीड़न को लेकर आज कांग्रेस सड़कों पर उतरी है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आज कांग्रेस की महिला विंग आर ब्लॉक से लेकर विधानसभा मार्च करने के लिए निकली थी लेकिन उन्हें पुलिस द्वारा रोक दिया गया। हाथों में बैनर पोस्टर लिए सभी महिलाएं सड़क पर उतरी हुई थी। बलात्कार पर चुप्पी क्यों, नीतीश मोदी शर्म करो, महिला हिंसा पर हल्ला बोल, जैसे नारे लगाए जा रहे थे। घर से निकलने में भी डर लगता- जन्नत प्रवीण प्रदर्शन में शामिल जन्नत प्रवीण नाम की महिला ने कहा कि, ‘हम लोग महिला सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं। बिहार में महिला बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। आजकल हमें घर से निकलने में भी डर लगता है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘कुछ माता-पिता ने तो अपने बच्चियों का घर से निकलना ही बंद कर दिया है और उनकी पढ़ाई लिखाई भी रोक दी है। कई लड़कियों की तो शादी करवा दी गई है। अगर महिलाएं सुरक्षित होती तो हमें सड़क पर आज उतरना नहीं पड़ता। महिलाएं सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है।’ हाथों में नीतीश-मोदी शर्म करो के पोस्टर लिए खड़ी हैं महिलाएं महिलाओं ने कहा कि, ‘हम इस पोस्टर के माध्यम से यह दिखाना चाहते हैं कि अब तो दोनों शर्म कर लें। बिहार में महिलाओं का रेप अब आम बात हो गया है। जो यह कहते हैं कि नीतीश सरकार ने बिहार में महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है, उसके लिए यह तमाचा है।’ सम्राट दो-दो पद लेकर बैठे, एक का भी काम नहीं कर रहे- महिलाएं प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि नीट छात्रा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही है कि उसके साथ बलात्कार हुआ है, लेकिन डीजीपी पीड़िता की मां को इस बात से नकार कर रही है। सम्राट चौधरी दो-दो पद लेकर बैठे हैं, लेकिन एक पद का भी काम नहीं कर रहे हैं। कुछ वर्षों से बिहार में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी- विवेक कुमार प्रदर्शन में शामिल विवेक कुमार ने कहा कि, ‘सरकार हमेशा से जनता की आवाज को दबाती रही है। पिछले कुछ वर्षों से बिहार में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी है। चुनाव के दौरान बिहार में महिलाएं ही मुद्दा थी, लेकिन इसके बावजूद महिला के खिलाफ हिंसा में कोई कमी नहीं आ रही है।’ उनका मानना है कि, ‘महिला के प्रति अत्याचार कम नहीं हुई है और इसी को लेकर आज हम सड़क पर उतरे हुए हैं। आखिर सुप्रीम कोर्ट का गाइडलाइंस जारी होने के बावजूद भी महिला कॉलेज, स्कूल या ऑफिस में यह गाइडलाइंस लागू क्यों नहीं हुई है।’


