कैग(नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक) ने भोपाल के मास्टर प्लान को घोषित नहीं करने के मामले में गंभीर टिप्पणी की है। कैग ने कहा कि यह भोपाल के मास्टर प्लान को 20 साल बीत जाने के बाद भी अंतिम रूप नहीं देना जोखिम भरा है। वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के वक्त जो जनसंख्या थी, उसमें 100 फीसदी से ज्यादा वृद्धि हो गई है। वर्ष 2000 से 2021 के बीच ही अवैध कॉलोनियों की संख्या में 175% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में लगातार भोपाल विकास योजना को टाला जा रहा है। यह सरकार का मनमानीपूर्ण रवैया है। कैग रिपोर्ट शुक्रवार को सदन में पेश हुई। इसमें सवाल खड़े किए गए कि टीएंडसीपी संचालक जवाब दे रहे हैं कि अगस्त 2009 में मास्टर प्लान 2021 तैयार किया। यह प्रकाशित नहीं हो पाया। शासन ने कहा, इस पर पुनर्विचार करें। 2011 में इसे लौटाया। फिर इसे 2031 के हिसाब से बनाने के लिए कहा गया। इसे भी फरवरी 2024 में लौटा दिया गया। अब इसे 2047 को ध्यान में रखकर तैयार करना है। इसका प्रकाशन बाकी है। कैग ने कहा कि उज्जैन, जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर के मास्टर प्लान के बारे में टीएंडसीपी से आंकड़े व कागज मांगे गए, लेकिन नहीं दिए गए। टीएंडसीपी का नगर निगमों के साथ कोई समन्वय नहीं है। वह ठीक से काम नहीं कर रहा। सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है। कैग की टिप्पणी-टीएंडसीपी का नगर निगमों से कोई समन्वय नहीं, सिर्फ औपचारिकता निभा रहा; उज्जैन, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर की विकास योजना के लिए क्या किया, नहीं बता रहा भोपाल में 182%, इंदौर में 121%, ग्वालियर में 62% झुग्गियां बढ़ीं कैग ने चौंकाने वाला आंकड़ा दिया कि भोपाल में 2001 से 2011 के बीच ही झुग्गियों में ढाई लाख की आबादी बढ़ी है। भोपाल में झुग्गियों की संख्या 182%, इंदौर में 121%, ग्वालियर में 62% और उज्जैन में 27 % बढ़ीं। बार-बार जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। कैग के घेरे में… प्रमुख शहरों के ये संस्थान और निर्माण नाले की जगह पर अतिक्रमण…
भोपाल के सेंट फ्रांसिस स्कूल, होटल महेंद्र उत्सव, एसएस क्रिएशन, 200 बेड का अस्पताल, शॉपिंग मॉल ब्लिंग स्क्वायर और मंत्रा इंफ्रास्ट्रक्चर। ग्वालियर के सनराइज इनक्लेव, 7 रिजार्ट हिल्स व आदित्य वर्ल्ड स्कूल। इंदौर में ग्राफिक्स बिल्डकॉन और उज्जैन में कला जानकी गोल्ड व आर्थो अस्पताल। खुली जगह पर कब्जा… भोपाल में बीएसएसएस, एनी विला अपार्टमेंट, गोदाम, लीजर वैली अपार्टमेंट, सेंट मोंट फोर्ट स्कूल, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र जाटखेड़ी, समरधा होटल, भोपाल सर्जिकल एंड मैटरनिटी अस्पताल, शॉपिंग मॉल, नोबल मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल। ग्वालियर की 11 संस्थाएं, इंदौर की 17 व उज्जैन की 9 संस्थाएं। तलघर में अतिक्रमण… भोपाल में पलक बारात घर, राजहंस होटल, भोपाल सर्जिकल व मैटरनिटी अस्पताल, ब्लिंग स्क्वायर शॉपिंग मॉल व नोबल मल्टी स्पेशियलिटी। {भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर व उज्जैन में 259 करोड़ आश्रय शुल्क वसूला, लेकिन कहां खर्च किया कोई रिकॉर्ड नहीं।
सीएम का दौरा होना था, तो PWD इंजीनियरों ने बिना डीपीआर और बिना टेंडर बनवा दीं 7 रोड कैग की रिपोर्ट में बताया गया कि सीएम के प्रस्तावित दौरे की आड़ में पीडब्ल्यूडी ने नियमों को दरकिनार कर 7 सड़कें बिना नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (एनआईटी) के बनवा दीं। इनकी लागत 46 लाख से 5.10 करोड़ रुपए तक रही। इन कार्यों के लिए न डीपीआर तैयार की गई और न हटेंडर जारी किए गए। काम उसी ठेकेदार को सौंप दिया गया, जो पहले से अन्य सड़कें बना रहा था। जनवरी 2002 के सरकारी नियमों के अनुसार स्वीकृत कार्यों के अलावा बिना एनआईटी अतिरिक्त सड़क का निर्माण नहीं किया जा सकता।
सड़कों के निर्माण में 424 दिन तक की देरी
बनाई गई सड़कों में 424 दिन तक की देरी दर्ज की गई और कई मामलों में फोर क्लोजर करना पड़ा। ईपीसी मॉडल के अनुबंधों में समय पर काम पूरा होने का दावा किया गया, लेकिन ठेकेदारों को शीघ्र बोनस देकर अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एनडीबी की 10 परियोजनाओं में क्षमता निर्माण के लिए स्वीकृत 26 करोड़ रुपए में से 13.79 करोड़ रुपए केपीएमजी को परामर्शी सेवाओं के भुगतान में खर्च किए गए। कैग रिपोर्ट में कहा गया कि सड़क विकास के लिए राज्य में कोई दीर्घकालिक मास्टर प्लान या रणनीतिक ढांचा नहीं था, जिससे परियोजनाओं का चयन अव्यवस्थित रहा और कार्यान्वयन में देरी हुई। जहां अपडेट करने की जरूरत नहीं वहां कर दी
कई सड़कों को डिजाइन अवधि पूरी होने से पहले ही सीसी रोड में अपग्रेड कर अनावश्यक खर्च किया गया। सतना के अमरपाटन–रामपुर रोड को कम यातायात के बावजूद समय से पहले अपग्रेड किया गया। झिन्ना-चरखी घाटी रोड का काम बंद कर बाद में टू लेन के लिए एमपीआरडीसी को सौंपा गया, लेकिन 5.12 करोड़ खर्च होने के बाद भी सड़क नहीं बन सकी। शिवपुरी के पिछोर–दिनारा प्रोजेक्ट में 7.40 किमी वन क्षेत्र अनियमित रूप से जोड़ने से 15 करोड़ खर्च के बाद भी सड़क अधूरी रही। मंदसौर में भाऊगढ़–सीतामऊ रोड भी समय से पहले अपग्रेड कर दी गई।। वक्फ बोर्ड ने करोड़ों की 2 लाख वर्ग मीटर सरकारी जमीन दबाई
कैग रिपोर्ट में बताया गया कि वक्फ की संपत्तियों की रैंडम जांच में 81 में से 33 संपत्तियां गड़बड़ निकलीं। इनका क्षेत्रफल 2 लाख 9 हजार 639 वर्ग मीटर है। कीमत 77.07 करोड़ आंकी गई है। कैग ने कहा कि नमूना जांच में ही 41% में अनियमितता मिली है। एक लाख से अधिक आय वाली 95% से ज्यादा का ऑडिट ही नहीं हुआ। एमपीपीएससी पर भी उठाए सवाल


