MP News: ग्वालियर शहर के दही मंडी क्षेत्र में मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक महिला की मौत के बाद उसके बेटे और बेटी चार दिन तक शव के साथ घर में ही रहते रहे। शव सड़ने से फैली दुर्गंध के बाद पड़ोसियों को घटना की जानकारी लगी और मामला उजागर हुआ।
दही मंडी स्थित मदन मोहन मार्केट में रहने वाली उर्मिला में भदौरिया (72) का शव शुक्रवार को उनके घर से सड़ी हुई अवस्था मिला। उर्मिला गोरखी स्कूल में क्लर्क पद से सेवानिवृत्त थीं। उनके पति सुरेंद्र सिंह का करीब 15 वर्ष पहले निधन हो चुका था। उनके साथ बेटा अखंड (42) और बेटी रितु (36) रहते थे। कोतवाली थाना पुलिस के अनुसार महिला संभवतः बीमार थी और 3 से 4 दिन पहले उनकी मौत हो गई थी। परिजन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उन्हें मृत मानने की बजाय जिंदा समझते रहे और शव के साथ ही घर में रह रहे थे।
दुर्गंध से हुआ खुलासा
आसपास के लोगों का घर में आना-जाना नहीं था, इसलिए किसी को महिला की मौत की जानकारी नहीं लग सकी। शुर वार को घर से तेज दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब घर के अंदर पहुंची तो महिला का शव सडी अवस्था में मिला।
शव उठाने से रोका
उनकी मौत हो गई थी। परिजन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उन्हें मृत मानने की बजाय जिंदा समझते रहे और शव के साथ ही घर में रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार बेटा और बेटी लगातार महिला को जिंदा बता रहे थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के दौरान बेटे ने विरोध किया और पुलिसकर्मियों से बहस भी की। बाद में पुलिसने समझाइश देकर शव को कब्जे में लिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
एसआई हरदा नायक ने बताया कि शव को परीक्षण के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण स्पष्ट होंगे। दोनों भाई-बहन की मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिस मामले की संवेदनशीलता से जांच कर रही है। कोतवाली थाना प्रभारी मोहिनी वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला मानसिक बीमारी से जुड़ा प्रतीत हो रहा है।
साइकोसिस में बनती है भ्रम की स्थिति
मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर ने बताया कि महिला की मौत के बाद बेटा और बेटी का कई दिनों तक शव को जिंदा समझकर घर में रखना मानसिक बीमारी साइकोसिस के लक्षणों की ओर संकेत करता है। इस स्थिति में व्यक्ति वास्तविकता और भ्रम के बीच अंतर नहीं कर पाता। विशेषज्ञों के अनुसार साइकोसिस से पीड़ित व्यक्ति अक्सर ऐसी बातों को भी सच मान लेता है जो वास्तविक नहीं होतीं। पर्याप्त इलाज और नियमित देखभाल नहीं मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है।
ऐसे मरीजों को चिकित्सकीय उपचार और निगरानी की आवश्यकता होती है। आमतौर पर किसी करीबी व्यक्ति के निधन या हादसे के बाद सामान्य लोगों में कुछ समय के लिए मानसिक आघात या भ्रम की स्थिति बन सकती है. लेकिन वह अस्थायी होती है। जबकि साइकोसिस से ग्रस्त मरीज लंबे समय तक वास्तविक स्थिति को स्वीकार नहीं कर पाते और भ्रम को ही सच मानते रहते हैं। (MP News)


