NASA: नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग स्टारलाइनर में तकनीकी खराबी के कारण 286 दिन अंतरिक्ष में फंसे रह गए थे जबकि उनका मिशन 8 दिन का था। अब नासा ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि यह केवल ‘खराब किस्मत’ नहीं थी, बल्कि खराब इंजीनियरिंग और कमजोर निगरानी का परिणाम था।
रिपोर्ट ने 2024 के इस मिशन को ‘टाइप-ए’ श्रेणी की आपदा घोषित किया गया है, वही श्रेणी जिसमें कल्पना चावला की मौत वाले ‘कोलंबिया’ और ‘चैलेंजर’ जैसे घातक शटल हादसे शामिल हैं। चैलेंजर में सात क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी, जब स्पेस शटल अपनी उड़ान के 73 सेकंड में टूट गया था, जबकि कोलंबिया धरती के एटमॉस्फियर में वापस आते ही टूट गया, जिससे उसमें सवार सभी सात एस्ट्रोनॉट्स मारे गए।

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब नासा अपने आर्टेमिस II चंद्र मिशन की तैयारी कर रहा है। विडंबना यह है कि इस मिशन के रॉकेट (एसएलएस) का मेन कॉन्टैक्टर भी बोइंग ही है। नासा अभी भी बोइंग के साथ काम करेगा, लेकिन बिना सुधार के स्टारलाइनर पर फिर कोई इंसान नहीं उड़ान भरेगा। जांच दल ने नासा और बोइंग को 61 औपचारिक सिफारिशें दी हैं।
बोइंग और नासा में तालमेल का अभाव
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि उस समय, अगर अलग फैसले लिए गए होते, अगर थ्रस्टर्स ठीक नहीं हुए होते, या डॉकिंग नाकाम रही होती, तो इस मिशन का नतीजा बहुत-बहुत अलग हो सकता था। माना जा रहा है कि नासा और बोइंग के बीच का अनुबंध ऐसा था जिसने नासा को तकनीकी विकास में हस्तक्षेप करने से रोका। जब क्रू को वापस लाने के विकल्पों पर चर्चा हो रही थी, तो नासा और बोइंग के अधिकारियों के बीच मतभेद भी हुए।
‘टाइप-ए’ में डालने का यह मतलब
नासा इस श्रेणी का उपयोग तब करता है जब कोई मिशन बहुत गंभीर स्थिति में पहुंच जाए। स्टारलाइनर के मामले में इसे इसलिए चुना गया क्योंकि थ्रस्टर्स (छोटे इंजन) के फेल होने से कैप्सूल ने अपने नियोजित पथ से नियंत्रण खो दिया था। भले ही अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित लौट आए, लेकिन उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इस विफलता से 20 लाख डॉलर से कहीं अधिक का नुकसान हुआ।


