बरेली। रेलवे देश में ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने और हाई स्पीड रैक उतारने के दावे कर रहा है, लेकिन बरेली मंडल की हकीकत कुछ और ही है। बरेली से मुरादाबाद, लखनऊ और चंदौसी रूट पर कुल 61 स्थान ऐसे हैं, जहां ट्रेनों को रफ्तार कम करनी पड़ रही है। कहीं ट्रैक की मरम्मत अधूरी है तो कहीं ब्लाक न मिलने से काम लटका पड़ा है। नतीजा ये है कि ट्रेनें काशन लेकर गुजर रही हैं और यात्री देर से पहुंच रहे हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि बरेली जंक्शन के यार्ड में दो साल से ज्यादा समय से पूरा ब्लाक नहीं मिल पाया है। इसी वजह से यहां ट्रेनों की गति कम रखनी पड़ती है। मुरादाबाद यार्ड का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां कई स्थानों पर लंबे समय से मरम्मत की जरूरत है, लेकिन ट्रेनों की आवाजाही ज्यादा होने से ब्लाक मिलना मुश्किल हो रहा है।
चंदौसी रूट पर 19 जगह काशन
बरेली से चंदौसी जाने वाली लाइन पर इस समय 19 स्थानों पर काशन लगा हुआ है। जंक्शन यार्ड, कर्व और अन्य कमजोर हिस्सों पर ट्रेनों को धीरे-धीरे निकाला जा रहा है। इसका सीधा असर सफर के समय पर पड़ रहा है। बरेली से मुरादाबाद रूट पर 21 स्थानों पर काशन लागू है। इनमें बरेली यार्ड, सीबीगंज और मुरादाबाद यार्ड जैसे अहम पॉइंट शामिल हैं। वहीं बरेली-लखनऊ रूट पर भी 21 जगह ट्रेनों को रफ्तार कम करनी पड़ रही है। शाहजहांपुर और रोजा जैसे स्टेशनों के पास भी ट्रेनें धीमी हो जाती हैं।
सालों से अस्थायी इंतजार
कई स्थान ऐसे हैं जहां एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन साल से काशन लगा हुआ है। कुछ जगह जनवरी-फरवरी में नया मरम्मत कार्य शुरू हुआ है, लेकिन पुराने बिंदुओं पर काम पूरा होना अभी बाकी है। लंबा ब्लाक लेने से दर्जनों ट्रेनें प्रभावित होंगी, इसलिए रेलवे कामचलाऊ तरीके से काशन के सहारे ट्रेनों को निकाल रहा है। मुख्य वाणिज्य निरीक्षक मो. सैय्यद इमरान चिश्ती का कहना है कि मरम्मत कार्य के कारण काशन लगाया जाता है और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए जोखिम नहीं लिया जा सकता। जहां ब्लाक की जरूरत है, वहां प्रक्रिया चल रही है।
यात्रियों पर दोहरी मार
एक ओर हाई स्पीड ट्रेन के सपने दिखाए जा रहे हैं, दूसरी ओर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को लेटलतीफी झेलनी पड़ रही है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों या छात्र—सभी को अतिरिक्त समय लेकर चलना पड़ रहा है। रेलवे के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला साफ दिख रहा है। अब सवाल यही है कि क्या 61 जगहों पर लगी यह धीमी चाल जल्द खत्म होगी या बरेली रूट की ट्रेनें यूं ही रेंगती रहेंगी।


