गोल्डन सिटी की डर्टी रियलिटी… सफाई सिस्टम ही फेल

गोल्डन सिटी की डर्टी रियलिटी… सफाई सिस्टम ही फेल

पोस्टकार्ड पर चमकती तस्वीरें, जमीन पर कचरे के ढेर..। यही है जैसलमेर की डर्टी रियलिटी। हर माह करीब एक करोड़ रुपए खर्च, फिर भी नालियां ओवरफ्लो, सड़कों पर प्लास्टिक, दीवारों पर बदरंग दाग।

अमरसागर-हनुमान चौराहा से लेकर गोपा चौक-शिव मार्ग तक, गांधी कॉलोनी से चैनपुरा मार्ग और कलाकार कॉलोनी तक—गंदगी लोकल लाइफस्टाइल का हिस्सा बनती जा रही है। पांच किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन से ज्यादा ऐसे पॉकेट हैं, जहां चलना भी चैलेंज है। रात होते ही कई इलाकों में नालियों का पानी सड़कों पर फैल जाता है। दिन में धूल, शाम को दुर्गंध और रात में ओवरफ्लो—यह हर दिन की कहानी है।

संडे: सिस्टम का ऑफ डे

रविवार को सफाई की रफ्तार और स्लो। कचरा संग्रहण केन्द्रों पर ढेर, प्लास्टिक की परतें और बढ़ती बदबू। दुकानदारों की सेल डाउन, आमजन की सहनशक्ति भी। गोपा चौक में आधुनिक शौचालय मौजूद, फिर भी खुले में लघुशंका जारी। कलेक्ट्रेट मार्ग पर मूत्रालय है, पर दीवारें बदरंग। यानी समस्या सिर्फ संसाधनों की नहीं, इम्प्लीमेंटेशन और बिहेवियर की भी है। जानकारों की माने तो यहां रेगुलर मॉनिटरिंग का अभाव साफ दिखता है। सफाई अक्सर त्योहारों या वीआईपी विजिट से पहले ‘स्पेशल मोड’ में आती है। सवाल यह नहीं कि बजट कितना है, सवाल यह है कि रिजल्ट क्यों नहीं?

गुणवत्ता की कमी

आम रास्तों पर कचरा ही मिलता है। कर्मचारी आते-जाते दिखते हैं, पर काम की क्वालिटी नहीं दिखती। अगर वार्ड स्तर पर रोजाना रिपोर्टिंग और फोटो-बेस्ड ट्रैकिंग हो, तो जवाबदेही तय हो सकती है। अभी सिस्टम ऑटो मोड में है, कंट्रोल मोड में नहीं।

-रामलाल, दुकानदार

रील्स और रियल लाइफ में जुदा स्थिति

हम इंस्टाग्राम पर जैसलमेर की रील्स देखते हैं, लेकिन रियल लाइफ में सड़कों की हालत अलग है। नगर परिषद को ऐप-बेस्ड शिकायत सिस्टम और लाइव डैशबोर्ड शुरू करना चाहिए। साथ ही लोगों को भी सिविक सेंस सीखना होगा। सिर्फ सरकार को दोष देकर काम नहीं चलेगा।

-पूजा चौधरी, छात्रा

गंदगी से गिरेगी साख

टूरिज्म हमारी इकोनॉमी की रीढ़ है। गेस्ट पहले शहर देखते हैं, फिर होटल। अगर बाहर गंदगी होगी, तो इमेज डाउन होगी। बड़े बजट के साथ थर्ड पार्टी ऑडिट और प्रोफेशनल क्लीनिंग मॉडल लाना जरूरी है। ब्रांड ‘गोल्डन सिटी’ को ग्राउंड पर भी गोल्डन बनाना होगा।

  • कासम खां, पर्यटन व्यवसायी
    दिखना चाहिए नतीजा

रात को नालियों का पानी सड़कों पर फैल जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। शिकायत करने पर सुनवाई धीमी है। हमें बड़े दावे नहीं चाहिए, रोज साफ सड़क चाहिए। वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी तय हों और नतीजा दिखे।

-मीरा देवी, गृहणी

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