कैमूर के अमरीश अग्रवाल ने स्ट्रॉबेरी से लाखों कमाए:पारंपरिक खेती छोड़ ड्रिप इरिगेशन से मिला 80% अनुदान

कैमूर के अमरीश अग्रवाल ने स्ट्रॉबेरी से लाखों कमाए:पारंपरिक खेती छोड़ ड्रिप इरिगेशन से मिला 80% अनुदान

कैमूर में भभुआ निवासी अमरीश अग्रवाल ने पारंपरिक धान-गेहूं की खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। पुणे से तकनीक सीखने के बाद उन्होंने 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 4000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए हैं, जिससे उन्हें लाखों का मुनाफा होने की उम्मीद है। शुरुआती अनुभव में अमरीश को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जहां 800 पौधे खराब हो गए। हालांकि, उनकी मेहनत से 3200 पौधे बच गए और अब वे भरपूर फल दे रहे हैं। वर्तमान में प्रतिदिन 35 से 45 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो रहा है। यह फसल मार्च के अंत तक चलेगी सितंबर के अंत में लगाई गई यह फसल मार्च के अंत तक चलेगी। अमरीश अग्रवाल के अनुसार, इस छोटे से क्षेत्र से पूरे सीजन में लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होने की संभावना है। भभुआ का मौसम स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन अमरीश ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। कृषि विभाग से ड्रिप इरिगेशन पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलने से उनकी लागत कम हुई और उत्पादन में सुधार हुआ। ऐसी नई फसलें किसानों में रुचि बढ़ा रही मोहम्मद शहजाद अंसारी ने अमरीश के खेत का दौरा किया और कहा कि ऐसी नई फसलें किसानों में रुचि बढ़ा रही हैं। जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार गौरव ने अमरीश को एक मेहनती किसान बताया। उन्होंने कहा कि विभाग ने ड्रिप इरिगेशन और बोरिंग का लाभ देकर अमरीश का सहयोग किया है। डॉ. गौरव ने अन्य किसानों को भी ऐसी खेती अपनाकर मुनाफा बढ़ाने की सलाह दी। अमरीश अग्रवाल ने युवाओं से अपील की है कि वे नौकरी की बजाय उच्च मूल्य वाली ऐसी खेती को अपनाएं, जो नौकरी से भी अधिक आय दे सकती है। उनकी यह सफलता भभुआ में कृषि विविधीकरण की एक नई मिसाल बन रही है। कैमूर में भभुआ निवासी अमरीश अग्रवाल ने पारंपरिक धान-गेहूं की खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। पुणे से तकनीक सीखने के बाद उन्होंने 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 4000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए हैं, जिससे उन्हें लाखों का मुनाफा होने की उम्मीद है। शुरुआती अनुभव में अमरीश को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जहां 800 पौधे खराब हो गए। हालांकि, उनकी मेहनत से 3200 पौधे बच गए और अब वे भरपूर फल दे रहे हैं। वर्तमान में प्रतिदिन 35 से 45 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो रहा है। यह फसल मार्च के अंत तक चलेगी सितंबर के अंत में लगाई गई यह फसल मार्च के अंत तक चलेगी। अमरीश अग्रवाल के अनुसार, इस छोटे से क्षेत्र से पूरे सीजन में लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होने की संभावना है। भभुआ का मौसम स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन अमरीश ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। कृषि विभाग से ड्रिप इरिगेशन पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलने से उनकी लागत कम हुई और उत्पादन में सुधार हुआ। ऐसी नई फसलें किसानों में रुचि बढ़ा रही मोहम्मद शहजाद अंसारी ने अमरीश के खेत का दौरा किया और कहा कि ऐसी नई फसलें किसानों में रुचि बढ़ा रही हैं। जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार गौरव ने अमरीश को एक मेहनती किसान बताया। उन्होंने कहा कि विभाग ने ड्रिप इरिगेशन और बोरिंग का लाभ देकर अमरीश का सहयोग किया है। डॉ. गौरव ने अन्य किसानों को भी ऐसी खेती अपनाकर मुनाफा बढ़ाने की सलाह दी। अमरीश अग्रवाल ने युवाओं से अपील की है कि वे नौकरी की बजाय उच्च मूल्य वाली ऐसी खेती को अपनाएं, जो नौकरी से भी अधिक आय दे सकती है। उनकी यह सफलता भभुआ में कृषि विविधीकरण की एक नई मिसाल बन रही है।  

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