नाबालिगों से दुष्कर्म करने वाले दंपती को फांसी की सजा: जेई बनाता था अश्लील वीडियो करता बिक्री, जज बोले- आखिरी दम तक लटकाओ

नाबालिगों से दुष्कर्म करने वाले दंपती को फांसी की सजा: जेई बनाता था अश्लील वीडियो करता बिक्री, जज बोले- आखिरी दम तक लटकाओ

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बच्चों के यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री विदेशों में भेजने के मामले में अदालत ने कड़ा निर्णय दिया है। विशेष पॉक्सो अदालत ने शुक्रवार को आरोपी पति-पत्नी को मृत्युदंड सुनाया। साथ ही पीड़ित बच्चों को आर्थिक सहायता देने के निर्देश जिला प्रशासन को दिया है।

बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने बहुचर्चित बाल शोषण मामले में आरोपी दंपति को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया था। और शुक्रवार को सजा का ऐलान किया। न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने आदेश में कहा कि दोषियों को कानून के तहत मृत्युदंड दिया जाए। अदालत ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। मामले में मुख्य आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था। उसकी पोस्टिंग चित्रकूट में थी। उसकी पत्नी दुर्गावती गृहिणी थी। जांच में सामने आया कि दोनों मिलकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने संपर्क में लाते थे। इसके बाद बच्चों का शोषण कर उनकी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो तैयार किए जाते थे। इन सामग्रियों को कथित रूप से डार्क वेब के जरिए विदेशों में भेजा जाता था।

सीबीआई ने दर्ज किया था केस

इस मामले का खुलासा वर्ष 2020 में हुआ। 31 अक्टूबर 2020 को Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने केस दर्ज किया। 17 नवंबर 2020 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़ितों के बयान एकत्र किए। गिरफ्तारी के करीब 88 दिन बाद लगभग 700 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई।

इंटरपोल से मिली सूचना मोबाइल नंबर ट्रेस करने पर खुली पोल

सुनवाई के दौरान 74 गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच की शुरुआत इंटरपोल से मिली सूचना के आधार पर हुई थी। जब संबंधित मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया गया तो आरोपी दंपति की संलिप्तता सामने आई। बताया गया कि जब्त की गई डिजिटल सामग्री में कई बच्चों की वीडियो और तस्वीरें थीं। जो बांदा, चित्रकूट और आसपास के जिलों से जुड़े थे। पीड़ित बच्चों का इलाज दिल्ली स्थित अस्पताल में कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में की गई। फैसले के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराधों पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा। और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।

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