Galgotias University इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। वजह है दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026, जहां यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबोट डॉग पेश किया गया। इसका नाम रखा गया था ‘ओरियन’। दावा किया गया कि इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने विकसित किया है। लेकिन मामला कुछ और ही निकला। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही इस बात की फैक्ट चेक हो गई। सोशल मीडिया पर इस दावे को सबूत के साथ नकार दिया गया। बताया गया कि यह दरअसल चीनी कंपनी Unitree Robotics का मॉडल Unitree Go2 है, जो बाजार में आसानी से खरीदा जा सकता है। भारत में इसकी कीमत करीब 2 से 3 लाख रुपये बताई जाती है।
Galgotias University Robot Controversy: यूनिवर्सिटी की सफाई
इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर इसे यूनिवर्सिटी का खुद का इनोवेशन क्यों बताया गया? विवाद इतना बढ़ा कि आयोजकों ने यूनिवर्सिटी को समिट से अपना स्टॉल हटाने के निर्देश दे दिए। हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से सफाई आई कि रोबोट को छात्रों की पढ़ाई और प्रैक्टिकल एक्सपोजर के लिए खरीदा गया था, न कि उसे अपना आविष्कार बताने के लिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मालिक कौन हैं, उन्होंने खुद कितनी पढ़ाई की है या उनका नेट वर्थ कितनी है? आइये जानते हैं।
Galgotias University Owner: कौन हैं सुनील गलगोटिया?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक, चांसलर और मालिक सुनील गलगोटिया हैं। उनके बेटे ध्रुव गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सीईओ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। परिवार का व्यापारिक इतिहास नया नहीं है। 1930 के दशक से यह परिवार किताबों के कारोबार से जुड़ा रहा है। दिल्ली के कनॉट प्लेस में “ईडी गलगोटिया एंड संस” नाम की एक छोटी सी बुक शॉप से शुरुआत हुई थी। सुनील गलगोटिया ने सेंट कोलंबा स्कूल से पढ़ाई की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया।
Galgotias University Owner Net Worth: कितना है नेट वर्थ?
साल 2000 में सिर्फ 40 छात्रों के साथ गलगोटियास इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की शुरुआत हुई। इसके बाद इंजीनियरिंग कॉलेज खोला गया। धीरे-धीरे संस्थान का विस्तार होता गया और 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार से यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया। आज इस यूनिवर्सिटी में 40 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। 40 से अधिक देशों के विद्यार्थी यहां शिक्षा ले रहे हैं। एक लाख से ज्यादा पूर्व छात्र दुनिया के अलग-अलग देशों में काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरा शिक्षा समूह करीब 3000 करोड़ रुपये का हो चुका है।


