अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल को लेकर भारत की एक-एक चाल पर नजर बनाए हुए हैं। ट्रंप के बेहद करीबी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसको लेकर बड़ा बयान दिया है।
सर्जियो गोर ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में देखा है कि भारत ने तेल की सोर्सिंग में डाइवर्सिटी लाई है।
अमेरिकी राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका नहीं चाहता कि कोई भी देश रशियन ऑयल खरीदे, क्योंकि वॉशिंगटन यूक्रेन और रूस के बीच शांति लाने की अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है।
AI इम्पैक्ट समिट में पहुंचे थे अमेरिकी राजदूत
अमेरिकी राजदूत ने यह बात दिल्ली में हो रहे ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट के मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। जब रशियन तेल के बारे में अमेरिका के मॉनिटरिंग मैकेनिज्म के बारे में पूछा गया, तो गोर ने कहा- तेल पर, एक एग्रीमेंट है। हमने देखा है कि इंडिया ने अपने तेल में डाइवर्सिटी लाई है।
उन्होंने कहा- भारत का एक कमिटमेंट है। यह सिर्फ इंडिया के बारे में नहीं है। यूनाइटेड स्टेट्स नहीं चाहता कि कोई रशियन तेल खरीदे। प्रेसिडेंट इस बारे में बहुत क्लियर रहे हैं, वह चाहते हैं कि जंग खत्म हो। और इसलिए जो कोई भी किसी भी तरह से उस लड़ाई में अभी भी शामिल है, प्रेसिडेंट उसे खत्म होते देखना चाहते हैं, ताकि शांति आ सके।
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करना चाहते हैं ट्रंप
रूस और यूक्रेन के बीच संकट खत्म करने की कोशिशों में, ट्रंप लगातार रूस से एनर्जी डीकपलिंग की अपील कर रहे हैं। वहीं, ट्रंप के 2.0 एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े कई अधिकारी बार-बार तेल एक्सपोर्ट रोकने की बात कर रहे हैं।
रूसी तेल को लेकर क्या है भारत का स्टैंड?
उधर, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि सही मार्केट की स्थितियों और बदलते इंटरनेशनल हालात के हिसाब से एनर्जी सोर्सिंग में विविधता लाना, भारत की 1.4 बिलियन की आबादी के लिए एनर्जी सिक्योरिटी पक्का करने की स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है।
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोर के साथ अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और व्हाइट हाउस के सलाहकार माइकल क्रैट्सियोस भी थे। हेलबर्ग ने अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में भारत के शामिल होने पर भरोसा जताया।


