ऐतिहासिक जितवारपुर गांव, जो अपनी पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग और शिल्प कला के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, अब क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से शुरू होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यारंभ समारोह 21 फरवरी 2026, शनिवार को आयोजित होगा। DPRO परिमल कुमार ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बिहार संग्रहालय द्वारा स्वीकृति के बाद यह योजना अब औपचारिक रूप से शुरू की जा रही है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कला संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जितवारपुर की कला को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान जितवारपुर गांव न केवल मधुबनी जिले, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। यहां के कलाकारों की मधुबनी पेंटिंग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान पा चुकी है। नई परियोजना के शुरू होने से सरकार का लक्ष्य है कि गांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान मिले। पारंपरिक शिल्प और चित्रकला को बाजार और पहचान दोनों मिलें। गांव में आने वाले पर्यटकों के लिए समर्पित क्राफ्ट सर्किट विकसित किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल कला को संरक्षित किया जाएगा बल्कि युवा पीढ़ी भी इससे प्रेरित होकर इस परंपरा को आगे बढ़ा सकेगी। स्थानीय कलाकारों के लिए रोजगार के नए अवसर जिला प्रशासन के अनुसार, क्राफ्ट टूरिज्म विलेज बनने के बाद गांव में क्राफ्ट हब, ट्रेनिंग सेंटर, डेमोन्स्ट्रेशन स्पेस, प्रदर्शनी हॉल, और पर्यटकों के लिए इंटरएक्टिव अनुभव जोन का निर्माण होगा। इन सुविधाओं से स्थानीय शिल्पकारों को न केवल स्थायी रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अपनी कला को बेहतर दामों पर बेच सकेंगे। जितवारपुर की कलाकारों ने इस परियोजना को लेकर उत्साह जताया है। उनका कहना है कि सरकार की इस पहल से उनकी सदियों पुरानी कला को नई उड़ान मिलेगी। टकसाल प्रगति और जिले के विकास में अहम भूमिका परियोजना का उद्देश्य सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि जिले के समग्र विकास को नई दिशा देना है। पर्यटन बढ़ने से होटल, होमस्टे और लोकल परिवहन में वृद्धि महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर, गांव के बुनियादी ढांचे का विकास, राज्य और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं से जोड़ने में सुविधा, जैसी कई संभावनाएं तैयार होंगी। डीपीआरओ परिमल कुमार का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि मधुबनी की पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर आम लोगों और पर्यटकों तक जीवंत रूप में पहुंचाया जाए। 21 फरवरी को जुटेंगे अधिकारी कार्यारंभ समारोह में जिले के अधिकारियों, कला क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, स्थानीय शिल्पकारों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रहने की उम्मीद है। इसके बाद गांव में संरचनात्मक कार्यों की शुरुआत की जाएगी। जितवारपुर के लोगों का मानना है कि यह उनके गांव के लिए ऐतिहासिक क्षण है, सदियों से चली आ रही हमारी कला अब दुनिया तक जाएगी। यह महत्वाकांक्षी शुरुआत मधुबनी को सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। ऐतिहासिक जितवारपुर गांव, जो अपनी पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग और शिल्प कला के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, अब क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से शुरू होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यारंभ समारोह 21 फरवरी 2026, शनिवार को आयोजित होगा। DPRO परिमल कुमार ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बिहार संग्रहालय द्वारा स्वीकृति के बाद यह योजना अब औपचारिक रूप से शुरू की जा रही है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कला संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जितवारपुर की कला को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान जितवारपुर गांव न केवल मधुबनी जिले, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। यहां के कलाकारों की मधुबनी पेंटिंग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान पा चुकी है। नई परियोजना के शुरू होने से सरकार का लक्ष्य है कि गांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान मिले। पारंपरिक शिल्प और चित्रकला को बाजार और पहचान दोनों मिलें। गांव में आने वाले पर्यटकों के लिए समर्पित क्राफ्ट सर्किट विकसित किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल कला को संरक्षित किया जाएगा बल्कि युवा पीढ़ी भी इससे प्रेरित होकर इस परंपरा को आगे बढ़ा सकेगी। स्थानीय कलाकारों के लिए रोजगार के नए अवसर जिला प्रशासन के अनुसार, क्राफ्ट टूरिज्म विलेज बनने के बाद गांव में क्राफ्ट हब, ट्रेनिंग सेंटर, डेमोन्स्ट्रेशन स्पेस, प्रदर्शनी हॉल, और पर्यटकों के लिए इंटरएक्टिव अनुभव जोन का निर्माण होगा। इन सुविधाओं से स्थानीय शिल्पकारों को न केवल स्थायी रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अपनी कला को बेहतर दामों पर बेच सकेंगे। जितवारपुर की कलाकारों ने इस परियोजना को लेकर उत्साह जताया है। उनका कहना है कि सरकार की इस पहल से उनकी सदियों पुरानी कला को नई उड़ान मिलेगी। टकसाल प्रगति और जिले के विकास में अहम भूमिका परियोजना का उद्देश्य सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि जिले के समग्र विकास को नई दिशा देना है। पर्यटन बढ़ने से होटल, होमस्टे और लोकल परिवहन में वृद्धि महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर, गांव के बुनियादी ढांचे का विकास, राज्य और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं से जोड़ने में सुविधा, जैसी कई संभावनाएं तैयार होंगी। डीपीआरओ परिमल कुमार का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि मधुबनी की पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर आम लोगों और पर्यटकों तक जीवंत रूप में पहुंचाया जाए। 21 फरवरी को जुटेंगे अधिकारी कार्यारंभ समारोह में जिले के अधिकारियों, कला क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, स्थानीय शिल्पकारों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रहने की उम्मीद है। इसके बाद गांव में संरचनात्मक कार्यों की शुरुआत की जाएगी। जितवारपुर के लोगों का मानना है कि यह उनके गांव के लिए ऐतिहासिक क्षण है, सदियों से चली आ रही हमारी कला अब दुनिया तक जाएगी। यह महत्वाकांक्षी शुरुआत मधुबनी को सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।


