कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने का खेल लंबे समय से चल रहा था। हाल ही में पुलिस ने फर्जी लॉ की डिग्री हासिल करने वाले दीनू उपाध्याय और आशीष शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसके बाद इस गिरोह का नेक्सेस तोड़ने के लिए पुलिस कमिश्नर ने एक टीम तैयार की, टीम में तैनात एक इंस्पेक्टर शातिरों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए सिक्योरिटी गार्ड बन गए। शैलेंद्र बोला- इस उम्र मार्कशीट की क्या जरूरत इंस्पेक्टर को खुद पुलिस कमिश्नर ने 20 दिन पहले टॉस्क दिया था, पूरे मामले की बहुत गोपनीय तरीके से जांच शुरू हुई, जिसकी मॉनीटरिंग पुलिस कमिश्नर कर रहे थे। इंस्पेक्टर खुद को अनपढ़ बताकर सरगना मैथ टीचर शैलेंद्र के पास नौकरी के लिए पहुंचे और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए हाईस्कूल की मार्कशीट बनवाने की बात कही। जिस पर शैलेंद्र ने कहा कि– इस उम्र में मार्कशीट की क्या जरूरत है। जिस पर इंस्पेक्टर ने कहा कि हाईस्कूल की उम्र निकल चुकी है, एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी लग रही है, लेकिन कंपनी हाईस्कूल की मार्कशीट मांग रही है। अब तो हाईस्कूल भी नहीं कर सकता, इस पर शैलेंद्र ने प्राइवेट फार्म भरने की बात कही और पेपर देने के लिए कहा। इंस्पेक्टर ने काफी देर मान मनौव्वल करते हुए कहा कि–पूरे प्रोसेस से गुजरने में एक साल लग जाएंगे, तब तक तो नौकरी भी चली जाएगी। कुछ जुगाड़ करके मार्कशीट दिलवा दीजिए। 16 हजार बतौर एडवांस दिए थे जिसके बाद शैलेंद्र ने कहा कि एक रास्ता है, लेकिन पैसे ज्यादा पड़ेंगे। इंस्पेक्टर ने हामी भर दी तो शैलेंद्र बोला कि– 21 हजार रुपए में 20 दिन के अंदर हाईस्कूल की मार्कशीट का जुगाड़ करवा सकते हैं। इंस्पेक्टर ने कुछ और गुंजाइश की बात कही, तो शैलेंद्र बोला– इससे कम नहीं हो सकता, ऊपर तक पैसे पहुंचाने पड़ते है, जिसके बाद इंस्पेक्टर ने हामी भर दी। जिसके बाद 21 हजार में सौदा तय हुआ। शैलेंद्र ने एडवांस जमा करने के लिए 20 दिन के भीतर मार्कशीट देने का वादा किया। इंस्पेक्टर ने 16 हजार रुपए एडवांस दिए, 15 दिन बाद शैलेंद्र का वाट्सएप पर मैसेज आया कि आपका काम हो गया है, ऑफिस आ जाइए। वह शैलेंद्र के शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन कार्यालय पहुंचे तो उन्हें शैलेंद्र ने जामिया ऊर्दू अलीगढ़ की हाईस्कूल की मार्कशीट थमा दी। मार्कशीट सौंपते ही पहले से जाल बिछाए पुलिस ने आरोपी शैलेंद्र को धर दबोचा। इंस्पेक्टर ने बताया कि शैलेंद्र विश्वविद्यालयों के बाबूओं और कर्मचारियों से अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए उन्हें कई महंगे गिफ्ट देता था, इसके साथ ही उनके लिए तरह–तरह की पार्टियों का भी आयोजन कराता था। फेल स्टूडेंट का मिल जाता था डाटा, करते थे संपर्क पुलिस के मुताबिक गैंग से जुड़े रनियां निवासी दिलीप बाबू का नाम सामने आया है। दिलीप के पास फेल होने वाले स्टूडेंट्स का डाटा आ जाता था। इस पर ये लोग खुद ही छात्रों से संपर्क करते थे और बिना एग्जाम दिए पास की मार्कशीट दिलाने का वादा कर मोटी रकम वसूलते थे। गिरोह के दिए सर्टिफिकेट और मार्कशीट निजी नौकरी व अन्य कार्यों के लिए प्रयोग किए जाते हैं। दस्तावेज ऑनलाइन चेक कराने के बाद ही गिरोह मार्कशीट, प्रमाणपत्र देता था। अधिकारियों ने बताया कि इनके पास डी-फार्मा, बी-फार्मा और बीटेक समेत तमाम प्रोफेशनल कोर्सेज की डिग्री लेने वाले अधिकतर लोग आते थे। कई एडवोकेट्स के मुंशियों को एलएलबी की मार्कशीट दिलाने और फिर उन्हें वकील बनाने में भी इस गैंग का बड़ा हाथ है। मामले की जांच के लिए SIT का गठन डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि अभी गैंग से जुड़े 5 आरोपियों की तलाश की जा रही है। यह बहुत ही संगीन मामला है, जिसमें तमाम यूनिवर्सिटी के बाबू और कर्मचारी भी संलिप्त हैं, यह लोग किस तरह से प्रपत्रों में हेरफेर करते थे, जिससे मार्कशीट ऑनलाइन अपलोड हो जाती थी। इस सब तथ्यों के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। टीमें हर यूनिवर्सिटी मूल प्रपत्रों की जांच करने पहुंचेगी, जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी।


