स्पीकर प्रेम कुमार, मंत्री बिजेंद्र सहित 42MLA क्या छिपा रहे:पटना हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस, क्या जाएगी सबकी विधायकी, 5 सवाल-जवाब में जानें

स्पीकर प्रेम कुमार, मंत्री बिजेंद्र सहित 42MLA क्या छिपा रहे:पटना हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस, क्या जाएगी सबकी विधायकी, 5 सवाल-जवाब में जानें

पटना हाईकोर्ट ने एक साथ 42 विधायकों को नोटिस थमा दिया है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, ऊर्जा एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, विधायक चेतन आनंद सरीखे नेता शामिल हैं। हारने वाले उम्मीदवारों की याचिकाओं पर कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में पाया कि इन विधायकों के चुनावी हलफनामे में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई है। क्या स्पीकर और मंत्री की कुर्सियां डगमगा जाएंगी। या ये सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जो अंत में खारिज हो जाएगा। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में..। सवाल-1ः बिहार के 42 विधायकों को नोटिस भेजना का पूरा मामला क्या है? जवाबः विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, RJD विधायक चेतन आनंद, विधायक अमरेंद्र प्रसाद सहित 42 विधायकों के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की गई है। याचिका हारे हुए प्रत्याशियों ने दाखिल किया है। सवाल-2ः कोर्ट ने विधायकों को नोटिस जारी किया, आगे क्या होगा? जवाबः संविधान के ऑर्टिकल-329(b) के मुताबिक, कोई भी उम्मीदवार या वोटर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिए चुनाव के रिजल्ट को चुनौती दे सकता है। सवाल-3ः चुनावी हलफनामे में कैंडिडेट को क्या जानकारी देना अनिवार्य है? जवाबः बिल्कुल। नामांकन के समय प्रत्याशियों को एफिडेविट देना अनिवार्य है। इसमें प्रॉपर्टी, क्रिमिनल केसेज और एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की सही जानकारी देनी होती है। 2002 में वाजपेयी सरकार ने संसद के जरिए वोटरों के इस अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में PUCL (People’s Union for Civil Liberties) की याचिका पर एक जजमेंट दिया। जिसमें कहा गया… सवाल-4: क्या गलत जानकारी देने पर 42 विधायकों की विधायकी जाएगी? जवाबः यह 42 विधायकों के छिपाए गए फैक्ट के आधार पर तय होगा। लेकिन इसकी संभावना बेहद कम है। गलत जानकारी देने पर प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 (Representation of the People Act, 1951- RPA) के तहत सजा का प्रावधान किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों से समझिए… मतलब साफ है कि बिहार के 42 विधायकों की सदस्यता जाना मुश्किल है। हालांकि, आरोप साबित हुए तो 6 महीने तक की सजा हो सकती है। सवाल-5ः बिहार में पहले किसी सांसद-विधायक की सदस्यता गई है? जवाबः हाईकोर्ट से सदस्यता गई, सुप्रीम कोर्ट से बहाल हो गई। मामला तात्कालीन भाजपा सांसद छेदी पासवान का था। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर पटना हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2016 को उनकी लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया था। मतलब उनको सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। पटना हाईकोर्ट ने एक साथ 42 विधायकों को नोटिस थमा दिया है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, ऊर्जा एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, विधायक चेतन आनंद सरीखे नेता शामिल हैं। हारने वाले उम्मीदवारों की याचिकाओं पर कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में पाया कि इन विधायकों के चुनावी हलफनामे में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई है। क्या स्पीकर और मंत्री की कुर्सियां डगमगा जाएंगी। या ये सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जो अंत में खारिज हो जाएगा। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में..। सवाल-1ः बिहार के 42 विधायकों को नोटिस भेजना का पूरा मामला क्या है? जवाबः विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, RJD विधायक चेतन आनंद, विधायक अमरेंद्र प्रसाद सहित 42 विधायकों के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की गई है। याचिका हारे हुए प्रत्याशियों ने दाखिल किया है। सवाल-2ः कोर्ट ने विधायकों को नोटिस जारी किया, आगे क्या होगा? जवाबः संविधान के ऑर्टिकल-329(b) के मुताबिक, कोई भी उम्मीदवार या वोटर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिए चुनाव के रिजल्ट को चुनौती दे सकता है। सवाल-3ः चुनावी हलफनामे में कैंडिडेट को क्या जानकारी देना अनिवार्य है? जवाबः बिल्कुल। नामांकन के समय प्रत्याशियों को एफिडेविट देना अनिवार्य है। इसमें प्रॉपर्टी, क्रिमिनल केसेज और एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की सही जानकारी देनी होती है। 2002 में वाजपेयी सरकार ने संसद के जरिए वोटरों के इस अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में PUCL (People’s Union for Civil Liberties) की याचिका पर एक जजमेंट दिया। जिसमें कहा गया… सवाल-4: क्या गलत जानकारी देने पर 42 विधायकों की विधायकी जाएगी? जवाबः यह 42 विधायकों के छिपाए गए फैक्ट के आधार पर तय होगा। लेकिन इसकी संभावना बेहद कम है। गलत जानकारी देने पर प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 (Representation of the People Act, 1951- RPA) के तहत सजा का प्रावधान किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों से समझिए… मतलब साफ है कि बिहार के 42 विधायकों की सदस्यता जाना मुश्किल है। हालांकि, आरोप साबित हुए तो 6 महीने तक की सजा हो सकती है। सवाल-5ः बिहार में पहले किसी सांसद-विधायक की सदस्यता गई है? जवाबः हाईकोर्ट से सदस्यता गई, सुप्रीम कोर्ट से बहाल हो गई। मामला तात्कालीन भाजपा सांसद छेदी पासवान का था। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर पटना हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2016 को उनकी लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया था। मतलब उनको सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी।  

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