“हम लैब में गए तो प्रिंसिपल सर ने बिना पूछे वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जब कैमरा खुलवाया तो मोबाइल में हमलोगों की 100-150 तस्वीरें मिलीं। इसके बाद से हम खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।” सुपौल की दो महिला टीचरों ने यह आरोप लगाया। पूरा मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और DM सावन कुमार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला निर्मली के ANM ट्रेनिंग स्कूल सह छात्रावास से जुड़ा है। टीचरों ने प्रभारी प्रिंसिपल मौलाना साजिद इकबाल कैफी पर निजी तस्वीरें कैद करने, सुरक्षा में लापरवाही और प्रशासनिक गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं आरोपी प्रिंसिपल का कहना है कि उनके मोबाइल गैलरी में जो भी फोटोज थे, स्टूडेंट या महिला टीचर के सारे के सारे डिलीट कर दिए हैं। डीएम के निर्देश पर प्रशासनिक टीम जांच के लिए संस्थान पहुंची और हर एंग्ल से जांच में जुट गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें…
अब पूरा मामला सिलसिलेवार पढ़िए… घटना की शुरुआत तब हुई, जब एक महिला शिक्षिका ने ड्यूटी के दौरान प्रिंसिपल को मोबाइल में किसी फोटो को जूम कर देखते हुए देखा। जब उनकी नजर स्क्रीन पर गई तो उन्होंने अपनी और अन्य महिला शिक्षिकाओं की तस्वीरें देखीं। उन्होंने तुरंत आपत्ति जताई, जिसके बाद वहां मौजूद अन्य शिक्षिकाएं और कर्मचारी भी इकट्ठा हो गए। माहौल गर्म हो गया और मोबाइल की गैलरी जांचने की मांग उठी। मोबाइल की जांच में दो महिला शिक्षिकाओं की अलग-अलग एंगल से ली गई लगभग 150 तस्वीरें मिलीं। लंबे विवाद और दबाव के बाद मोबाइल से सभी तस्वीरें डिलीट कर दी गईं। बाद में प्रिंसिपल ने तस्वीरें होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उसने ये तस्वीरें इंस्टाग्राम से डाउनलोड की थीं। अब जानिए महिला टीचर ने क्या-क्या बताया.. महिला टीचर का कहना है कि लैब में बिना अनुमति वीडियो बनाने से पूरे विवाद की शुरुआत हुई। उनके शब्दों में, “हम लैब में गए थे, तभी सर ने बिना पूछे वीडियो बनाना शुरू कर दिया। हमने कहा कि यह गलत है, वीडियो डिलीट कर दीजिए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब हमने प्रशासन से शिकायत करने की बात कही, तब मोबाइल चेक हुआ और उसमें हमारी कई तस्वीरें मिलीं।’ वे आगे कहती हैं, ‘हमारी सबसे बड़ी चिंता संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। गर्ल्स हॉस्टल में न बाउंड्री वॉल है, न सुरक्षित मुख्य गेट। कोई स्थायी वार्डन नहीं है और पर्याप्त सुरक्षा गार्ड भी नहीं हैं।पानी और भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें रहती हैं। जब संस्थान के शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति ही इस तरह की हरकत करे, तो सुरक्षा की उम्मीद किससे करें?’ सरकारी ट्रेनिंग और बैठकों को लेकर भी महिला टीचर ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है, ‘हमें किसी भी सरकारी ट्रेनिंग या मीटिंग की जानकारी समय पर नहीं दी जाती। जब भी ट्रेनिंग लेटर आता है, सर खुद ही चले जाते हैं और हमें मौका नहीं मिलता। छात्रों के बीच भी यह कहा जाता है कि फैसले वही लेते हैं, जिससे हमारा मनोबल गिरता है।’ दो कमरों का इस्तेमाल करते थे प्रिंसिपल इधर, जांच के लिए प्रशासनिक टीम संस्थान पहुंची, जिसमें एसडीएम, एसडीपीओ, बीडीओ, सीओ और पुलिस बल शामिल थे। बताया गया कि प्रिंसिपल हॉस्टल के दो कमरों का उपयोग कर रहे थे। शिक्षिकाओं की आपत्ति के बाद कमरे से बेड और अन्य सामान बाहर निकलवाया गया। शिकायतकर्ताओं ने वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लाइब्रेरी और कॉलेज विकास के नाम पर खर्च हुई राशि का सही उपयोग नहीं हुआ और 2021 से अक्टूबर 2025 तक कोई बड़ा विकास कार्य नजर नहीं आता। पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। अब पढ़िए महिला फैकल्टी और रिपोर्टर के बीच बातचीत रिपोर्टर- फोटो वगैरह जो थी सारी डिलीट कर दी गई?
महिला टीचर- हां-हां, सारी डिलीट कर दी गई। रिपोर्टर- दोनों टीचर की फोटो थी?
महिला टीचर- ऐसे तो सबका ही रहता है। रिपोर्टर- लेकिन फोटो कितनी थी, डेढ़ सौ या दो सौ?
महिला टीचर- मिनिमम था, डेढ़-दो सौ के आसपास। रिपोर्टर- स्टूडेंट की भी फोटो थी क्या?
महिला टीचर- नहीं, स्टूडेंट की नहीं। रिपोर्टर- मतलब दो ही महिला टीचर की ही फोटो थी?
महिला टीचर- नहीं, जनरल व्हाट्सएप ग्रुप में जो रहते हैं, सभी की थी। रिपोर्टर- आप कब से यहां तैनात हैं?
महिला टीचर- 2021 में जॉइन की थी। रिपोर्टर- जांच में कौन अधिकारी आए थे?
महिला टीचर- एसडीएम साहब आए थे। रिपोर्टर- डीएसपी साहब?
महिला टीचर- हां, डीएसपी भी, थाना से भी लोग आए थे। रिपोर्टर- वीडियो सीईओ भी?
महिला टीचर- हां, वीडियो सीईओ साहब आए थे। “हम लैब में गए तो प्रिंसिपल सर ने बिना पूछे वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जब कैमरा खुलवाया तो मोबाइल में हमलोगों की 100-150 तस्वीरें मिलीं। इसके बाद से हम खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।” सुपौल की दो महिला टीचरों ने यह आरोप लगाया। पूरा मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और DM सावन कुमार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला निर्मली के ANM ट्रेनिंग स्कूल सह छात्रावास से जुड़ा है। टीचरों ने प्रभारी प्रिंसिपल मौलाना साजिद इकबाल कैफी पर निजी तस्वीरें कैद करने, सुरक्षा में लापरवाही और प्रशासनिक गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं आरोपी प्रिंसिपल का कहना है कि उनके मोबाइल गैलरी में जो भी फोटोज थे, स्टूडेंट या महिला टीचर के सारे के सारे डिलीट कर दिए हैं। डीएम के निर्देश पर प्रशासनिक टीम जांच के लिए संस्थान पहुंची और हर एंग्ल से जांच में जुट गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें…
अब पूरा मामला सिलसिलेवार पढ़िए… घटना की शुरुआत तब हुई, जब एक महिला शिक्षिका ने ड्यूटी के दौरान प्रिंसिपल को मोबाइल में किसी फोटो को जूम कर देखते हुए देखा। जब उनकी नजर स्क्रीन पर गई तो उन्होंने अपनी और अन्य महिला शिक्षिकाओं की तस्वीरें देखीं। उन्होंने तुरंत आपत्ति जताई, जिसके बाद वहां मौजूद अन्य शिक्षिकाएं और कर्मचारी भी इकट्ठा हो गए। माहौल गर्म हो गया और मोबाइल की गैलरी जांचने की मांग उठी। मोबाइल की जांच में दो महिला शिक्षिकाओं की अलग-अलग एंगल से ली गई लगभग 150 तस्वीरें मिलीं। लंबे विवाद और दबाव के बाद मोबाइल से सभी तस्वीरें डिलीट कर दी गईं। बाद में प्रिंसिपल ने तस्वीरें होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उसने ये तस्वीरें इंस्टाग्राम से डाउनलोड की थीं। अब जानिए महिला टीचर ने क्या-क्या बताया.. महिला टीचर का कहना है कि लैब में बिना अनुमति वीडियो बनाने से पूरे विवाद की शुरुआत हुई। उनके शब्दों में, “हम लैब में गए थे, तभी सर ने बिना पूछे वीडियो बनाना शुरू कर दिया। हमने कहा कि यह गलत है, वीडियो डिलीट कर दीजिए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब हमने प्रशासन से शिकायत करने की बात कही, तब मोबाइल चेक हुआ और उसमें हमारी कई तस्वीरें मिलीं।’ वे आगे कहती हैं, ‘हमारी सबसे बड़ी चिंता संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। गर्ल्स हॉस्टल में न बाउंड्री वॉल है, न सुरक्षित मुख्य गेट। कोई स्थायी वार्डन नहीं है और पर्याप्त सुरक्षा गार्ड भी नहीं हैं।पानी और भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें रहती हैं। जब संस्थान के शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति ही इस तरह की हरकत करे, तो सुरक्षा की उम्मीद किससे करें?’ सरकारी ट्रेनिंग और बैठकों को लेकर भी महिला टीचर ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है, ‘हमें किसी भी सरकारी ट्रेनिंग या मीटिंग की जानकारी समय पर नहीं दी जाती। जब भी ट्रेनिंग लेटर आता है, सर खुद ही चले जाते हैं और हमें मौका नहीं मिलता। छात्रों के बीच भी यह कहा जाता है कि फैसले वही लेते हैं, जिससे हमारा मनोबल गिरता है।’ दो कमरों का इस्तेमाल करते थे प्रिंसिपल इधर, जांच के लिए प्रशासनिक टीम संस्थान पहुंची, जिसमें एसडीएम, एसडीपीओ, बीडीओ, सीओ और पुलिस बल शामिल थे। बताया गया कि प्रिंसिपल हॉस्टल के दो कमरों का उपयोग कर रहे थे। शिक्षिकाओं की आपत्ति के बाद कमरे से बेड और अन्य सामान बाहर निकलवाया गया। शिकायतकर्ताओं ने वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लाइब्रेरी और कॉलेज विकास के नाम पर खर्च हुई राशि का सही उपयोग नहीं हुआ और 2021 से अक्टूबर 2025 तक कोई बड़ा विकास कार्य नजर नहीं आता। पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। अब पढ़िए महिला फैकल्टी और रिपोर्टर के बीच बातचीत रिपोर्टर- फोटो वगैरह जो थी सारी डिलीट कर दी गई?
महिला टीचर- हां-हां, सारी डिलीट कर दी गई। रिपोर्टर- दोनों टीचर की फोटो थी?
महिला टीचर- ऐसे तो सबका ही रहता है। रिपोर्टर- लेकिन फोटो कितनी थी, डेढ़ सौ या दो सौ?
महिला टीचर- मिनिमम था, डेढ़-दो सौ के आसपास। रिपोर्टर- स्टूडेंट की भी फोटो थी क्या?
महिला टीचर- नहीं, स्टूडेंट की नहीं। रिपोर्टर- मतलब दो ही महिला टीचर की ही फोटो थी?
महिला टीचर- नहीं, जनरल व्हाट्सएप ग्रुप में जो रहते हैं, सभी की थी। रिपोर्टर- आप कब से यहां तैनात हैं?
महिला टीचर- 2021 में जॉइन की थी। रिपोर्टर- जांच में कौन अधिकारी आए थे?
महिला टीचर- एसडीएम साहब आए थे। रिपोर्टर- डीएसपी साहब?
महिला टीचर- हां, डीएसपी भी, थाना से भी लोग आए थे। रिपोर्टर- वीडियो सीईओ भी?
महिला टीचर- हां, वीडियो सीईओ साहब आए थे।


