करनाल जिले की अनाज मंडियों में हुए धान घोटाले व फर्जी गेट पास के मामले में पुलिस ने आज मंडी सचिव आशा रानी व जुंडला मंडी सचिव दीपक कुमार को रिमांड पूरा होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने दोनों को दो दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड के दौरान आरोपियों से एक-एक लाख रुपए की रिकवरी की गई है। पुलिस की पूछताछ में किसी अन्य का भी कोई नाम सामने आया है या नहीं, इसको लेकर पुलिस की तरफ से कोई खुलासा नहीं किया गया है। वही बात की जाए मंडी सचिव आशा रानी की तो मंडी में फर्जी गेट पास के जरिए धान की खरीद दिखाने और करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोपों में करनाल की मंडी सचिव आशा रानी के खिलाफ सिटी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनके साथ ही अन्य कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान उनको सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि उन्हें गिरफ्तारी से बचाने के लिए हाई कोर्ट ने रोक (स्टे) लगा दी थी। घोटाले की जांच में अब तक कई और लोग भी पकड़े गए हैं। मंडी के सुपरवाइजर पंकज तुली की पहले गिरफ्तारी हुई, बाद में उसकी मौत हो गई। मंगलवार को किया गया था गिरफ्तार
मंगलवार को करनाल पुलिस ने दो दिन पहले करनाल मंडी सचिव आशा रानी व जुंडला मंडी के सचिव दीपक कुमार को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही असंध के मंडी सचिव कृष्ण धनखड़ को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था और डीएफएससी अनिल कुमार को भी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया था। बुधवार को ही करनाल के डीएसपी राजीव कुमार प्रैस कांफ्रेंस में खुलासा किया था कि धान घोटाले के सभी छह मामलों की जांच दो एसआईटी कर रही हैं। मंगलवार को पुलिस ने तीन एफआईआर में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया था। डीएसपी के मुताबिक, तरावड़ी मंडी में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर दर्ज मामले में तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार को प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया था। अनिल कुमार पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद थे, उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से एक दिन का पुलिस रिमांड मंजूर हुआ था। करनाल की मंडी सचिव आशा रानी और जुंडला मंडी सचिव दीपक कुमार को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था। असंध मंडी सचिव कृष्ण धनखड़ को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के लिए रिमांड पर लिया था। अभी वह रिमांड पर है। ऐसे की गई थी गड़बड़ी
डीएसपी ने बताया कि हरियाणा सरकार का ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल किसानों के लिए बनाया गया है। एमएसपी योजना के तहत किसान को इस पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है। जांच में सामने आया कि आढ़तियों और राइस मिलरों ने मिलीभगत कर फर्जी रजिस्ट्रेशन किए। जिनके पास जमीन नहीं थी या जो किसी अन्य पेशे में थे, उनके नाम पर भी जमीन दिखाकर पंजीकरण कर दिया गया। कहीं पांच एकड़ की जगह 25 एकड़ तक जमीन कागजों में दर्शाई गई। इस फर्जीवाड़े में बिना फसल आए ही कागजों में धान दिखा दी गई और फर्जी गेटपास जारी कर दिए गए। इन्हीं गेटपास के आधार पर फर्जी खरीद दर्शाई गई। जांच में खरीद एजेंसियों की मिलीभगत भी सामने आई है। बाद में मिलरों ने आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से सस्ते दाम पर सब्सिडी वाला धान खरीदकर स्टॉक पूरा दिखाया, ताकि भौतिक सत्यापन में गड़बड़ी पकड़ में न आए। 25 आरोपी गिरफ्तार, कुछ अब भी फरार
डीएसपी के अनुसार छह एफआईआर में अब तक करीब 25 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें अधिकारी, एजेंसी के कर्मचारी, आढ़ती और राइस मिलर शामिल हैं। कुछ आरोपी तफ्तीश में सहयोग कर रहे हैं, कुछ जमानत पर हैं, जबकि कुछ अभी भूमिगत हैं। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।


