बिजली तारों के जालों से मिलेगा छुटकारा, अगले तीन साल में अंडरग्राउंड केबलिंग, लोगों को मिलेगी राहत

बिजली तारों के जालों से मिलेगा छुटकारा, अगले तीन साल में अंडरग्राउंड केबलिंग, लोगों को मिलेगी राहत

रायपुर। राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर के आम लोगों को जल्द ही बाहर खंभों और जगह जगह लटक रहे बिजली तारों से छुटकारा मिलने वाला है। छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने दोनों जिलों को पूरी तरह अंडरग्राउंड केबलिंग करने की कार्ययोजना तैयार की है। गुरुवार को छत्तीसगढ़ के ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत रायपुर और बिलासपुर को ओवरहेड लाइनों को अगले तीन साल में अंडरग्राउंड कर दिया जाएगा। उन्होंने पावर कंपनीज की 3 वर्षों की कार्ययोजना और वर्तमान उपलब्धियों को पत्रकारों से साझा किया।

उन्होंने बताया कि रायपुर की ओवरहेड बिजली तारों 5394 किलोमीटर को अंडर ग्राउंड केबलिंग किया जाएगा। इसके लिए करीब 7600 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। साथ ही बिलासपुर की 2150 किलोमीटर बिजली तारों में 3100 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड किया जाएगा। यह काम अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में बड़ी प्रगति हुई है और आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस दौरान सीएसपीडीसीएल के एमडी भीम सिंह कंवर, सीएसपीजीसीएल के एमडी एसके कटियार, सीएसपीटीसीएल के एमडी राजेश कुमार शुक्ला समेत वरिष्ठ विभागीय अधिकारीगण मौजूद रहे।

करीब 31000 मेगावाट बिजली उत्पादन

डा. यादव ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी और निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30 हजार 671.7 मेगावाट है। इसमें 28 हजार 824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत और सोलर व बायोमास आदि स्रोतों से 2047 मेगावाट क्षमता शामिल है। ताप विद्युत क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी की 2840 मेगावाट, एनटीपीसी व निजी स्वामित्व के बिजलीघरों की 20 हजार 299 मेगावाट और कैप्टिव पावर प्लांट्स की 5266 मेगावाट क्षमता है।

2030 तक नेट जीरो कार्बन का लक्ष्य

उन्होंने बताया कि भारत सरकार का फोकस ताप विद्युत पर निर्भरता कम कर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर है। नेट जीरो कार्बन लक्ष्य के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य शासन द्वारा पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नीति 2023 लागू की गई है।
ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ाए कदम
नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड एवं राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम द्वारा लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर, कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट सौर संयंत्र तथा 500 मेगावाट ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है।

660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयां

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की तरफ से कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों और मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो गई है। जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, डॉ.खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना और बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

नक्सल इलाकों तक पहुंची बिजली

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विद्युतीकरण हेतु नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है। बस्तर क्षेत्र में ऑफ ग्रिड से विद्युतीकृत 524 ग्रामों का ग्रिड आधारित विद्युतीकरण किया गया है।

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