Nagaur patrika…जीरे की चमक फीकी, तीसरे सप्ताह में मंडी का रुख बदला…VIDEO

Nagaur patrika…जीरे की चमक फीकी, तीसरे सप्ताह में मंडी का रुख बदला…VIDEO

नागौर. कृषि उपज मंडी समिति में फरवरी की शुरुआत उत्साहजनक रही, लेकिन तीसरे सप्ताह तक आते-आते बाजार का संतुलन बदल गया। खासतौर पर जीरे के भाव में आई गिरावट ने काश्तकारों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले सप्ताह में जीरे का न्यूनतम भाव 19000 रुपए और अधिकतम 22700 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज हुआ था, जबकि गत 18 फरवरी को अधिकतम भाव घटकर 21650 रुपए और न्यूनतम 18000 रुपए रह गया। यानी अधिकतम दर में एक हजार रुपए से अधिक की कमी दर्ज हुई है। जिससे जीरे के काश्तकारों में मायूसी आई है।

मसाला वर्ग में नरमी का असर
जीरे के साथ-साथ अन्य मसाला जिंसों में भी गिरावट देखी गई। सौंफ पहले सप्ताह में 10200 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंची थी, जो 18 फरवरी को घटकर 9000 रुपए रह गई। इसबगोल के भाव 13800 रुपए के उच्च स्तर से फिसलकर 13300 रुपए तक आ गए। सिंधी सुवा 9000 रुपए से घटकर 8500 रुपए पर पहुंच गया। तारामीरा भी 5150 रुपए से घटकर 5050 रुपए रह गया। सरसों (रायडा) में भी नरमी दर्ज की गई। पहले सप्ताह में 40 प्रतिशत तेल का औसत भाव 6400 रुपए रहा, जबकि 18 फरवरी को नया रायडा 5800 और पुराना रायडा 6100 रुपए दर्ज हुआ। ग्वार में भी हल्की कमी आई और अधिकतम भाव 5331 रुपए से घटकर 5150 रुपए रह गया।

कुछ जिंसों में स्थिरता और हल्की मजबूती
हालांकि कृषि उपज मंडी में सभी जिंसों में गिरावट नहीं रही। ज्वार में मजबूती दिखी और अधिकतम भाव 5500 रुपए से बढकऱ 5800 रुपए पहुंच गया। विराट चमकी मूंग 8900 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास स्थिर रही। सामान्य मूंग 4000 से 7800 रुपए के दायरे में बनी रही। काला तिल 9500 रुपए के अधिकतम स्तर पर स्थिर रहा, जबकि सफेद तिल 11000 रुपए से घटकर 10500 रुपए पर आ गया। दाणा मेथी 5000 से 5350 रुपए के दायरे में रहने के बाद 5200 रुपए पर दर्ज की गई।

किसानों में संशय, व्यापारियों की नजर नीलामी पर
मंडी में आए इस बदलाव ने किसानों के बीच संशय का माहौल बना दिया है। पहले सप्ताह की तेजी से उत्साहित काश्तकार अब भावों में आई नरमी से चिंतित नजर आ रहे हैं। व्यापारी पवन भट्टड़ के अनुसार फरवरी के पहले सप्ताह की मजबूती के बाद तीसरे सप्ताह में जीरे सहित अधिकांश जिंसों में आई गिरावट ने बाजार का रुख बदल दिया है। उनका कहना है कि आगामी नीलामियों में मांग और आवक की स्थिति स्पष्ट करेगी कि बाजार दोबारा संभलता है या नरमी का दौर जारी रहता है। कुल मिलाकर फरवरी के पहले सप्ताह की तुलना में तीसरे सप्ताह में मंडी में मसाला वर्ग की जिंसों पर दबाव बढ़ा है, जिसमें जीरा प्रमुख रूप से प्रभावित रहा। अब बाजार की अगली चाल पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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