किशनगंज जिले के दिघलबैंक अंचल कार्यालय में कार्यरत निम्न वर्गीय लिपिक मो. फारूक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर अनधिकृत अनुपस्थिति, कर्तव्य में घोर लापरवाही और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के आरोप थे। विभागीय जांच में ये आरोप प्रमाणित पाए गए। जिला दण्डाधिकारी सह डीएम विशाल राज के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। डीएम विशाल राज ने बताया कि अंचल अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में मो. फारूक की बिना पूर्व अनुमति या सूचना के लगातार अनुपस्थिति की जानकारी दी थी। इस संबंध में उनसे कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मो. फारूक के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ में आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। जांच में पाया गया कि वे 9 अप्रैल 2024 से 22 अगस्त 2024 तक लगातार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। यह आरोप पूरी तरह से प्रमाणित हुआ। प्रमाणित आरोपों के आधार पर मो. फारूक को दूसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से भी सूचित कर निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने न तो कोई लिखित और न ही मौखिक स्पष्टीकरण दिया और लगातार अनुपस्थित रहे। संचालन प्रतिवेदन की समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि मो. फारूक ने सरकारी कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, शिथिलता, संवेदनहीनता और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की। उनका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों का उल्लंघन है। डीएम विशाल राज ने गुरुवार शाम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत मो. फारूक को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। किशनगंज जिले के दिघलबैंक अंचल कार्यालय में कार्यरत निम्न वर्गीय लिपिक मो. फारूक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर अनधिकृत अनुपस्थिति, कर्तव्य में घोर लापरवाही और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के आरोप थे। विभागीय जांच में ये आरोप प्रमाणित पाए गए। जिला दण्डाधिकारी सह डीएम विशाल राज के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। डीएम विशाल राज ने बताया कि अंचल अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में मो. फारूक की बिना पूर्व अनुमति या सूचना के लगातार अनुपस्थिति की जानकारी दी थी। इस संबंध में उनसे कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मो. फारूक के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ में आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। जांच में पाया गया कि वे 9 अप्रैल 2024 से 22 अगस्त 2024 तक लगातार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। यह आरोप पूरी तरह से प्रमाणित हुआ। प्रमाणित आरोपों के आधार पर मो. फारूक को दूसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से भी सूचित कर निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने न तो कोई लिखित और न ही मौखिक स्पष्टीकरण दिया और लगातार अनुपस्थित रहे। संचालन प्रतिवेदन की समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि मो. फारूक ने सरकारी कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, शिथिलता, संवेदनहीनता और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की। उनका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों का उल्लंघन है। डीएम विशाल राज ने गुरुवार शाम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत मो. फारूक को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।


