गोण्डा जिले में मत्स्य विभाग की योजनाओं में लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद शासन ने कड़ा कदम उठाया है। प्राथमिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की गई है।
राज्य सरकार की विभिन्न मत्स्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय स्तर पर जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर पाए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्रवाई पूरी होने तक मुख्यालय से संबद्ध करने के निर्देश जारी किए गए। कार्रवाई के तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण, गोण्डा में तैनात मछुआ प्रशांत कुमार को लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
शिकायत के बाद शासन स्तर से हुई कार्रवाई
जिले में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषादराज बोट योजना और मत्स्य पालक कल्याण कोष जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मछुआरों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। लेकिन शिकायतों के चलते शासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने स्पष्ट कहा कि सरकार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम जनता को परेशान करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।
कानपुर मंडल में भी शिकायतों के आधार पर हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे पहले 17 फरवरी 2026 को कानपुर मंडल में भी शिकायतों के आधार पर इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। वहां एक वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक को निलंबित किया गया था। अन्य अधिकारियों को मुख्यालय से अटैच किया गया था। जिले में हुई इस ताजा कार्रवाई से विभागीय अधिकारियों में हलचल मच गई है। शासन ने साफ संकेत दिया है कि योजनाओं में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।


