जयपुर। आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले प्रत्याशियों की पात्रता से जुड़ी बच्चों की बाध्यता वाली शर्त में बड़ी राहत देने की तैयारी है। स्वायत्त शासन विभाग ने विधि विभाग को जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें प्रत्याशी के बच्चों की अधिकतम संख्या तय करने की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है। इसका सीधा मतलब है कि कितने भी बच्चे हों, चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं होगी।
अब तक सरकार स्तर पर तीन बच्चों तक छूट देने की चर्चा थी, लेकिन प्रस्ताव में उससे भी आगे बढ़ते हुए सभी तरह की सीमाएं हटाने का संकेत दिया गया है। इसे सरकार की ओर से सभी सामाजिक और जातीय वर्गों को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
अगले पखवाड़े में तस्वीर होगी साफ
सूत्रों के अनुसार अगले एक पखवाड़े में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबंध में जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि प्रस्ताव पर अंतिम सहमति बनने के बाद नगर पालिका कानून में संशोधन करना आवश्यक होगा।
अध्यादेश के जरिए होंगे संशोधन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह संशोधन मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो निकाय चुनावों में उम्मीदवारों का दायरा बढ़ेगा। विधि विशेषज्ञ अशोक सिंह के मुताबिक मौजूदा विधानसभा सत्र में सीधे अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाया जा सकता है। इसके बाद अध्यादेश के जरिए संशोधन कर सकेंगे।
नेताओं की मांग..
अभी नियम यह है कि जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं, वे पंचायत या निकाय के चुनाव नहीं लड़ सकते। यह नियम जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन विभिन्न जनप्रतिनिधियों और नेताओं की मांग पर सरकार इसमें संशोधन करने जा रही है।
प्रस्ताव भेजा है
जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रस्ताव विधि विभाग को भेज गया है। उद्देश्य यह है कि चुनाव प्रक्रिया अधिक समावेशी और समान अवसर देने वाली हो। फिलहाल बच्चों की संख्या की बाध्यता नहीं होने का प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय विधिक प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा। -झाबर सिंह खर्रा, स्वायत्त शासन मंत्री


