Ahmedabad: शहर के सिविल अस्पताल में मानवता का एक और प्रेरक उदाहरण सामने आया है। महज़ 12 घंटे के भीतर अस्पताल को दो त्वचा और चार नेत्र प्राप्त हुए। यद दान दो मृतकों के परिजनों की परोपकारी निर्णय से संभव हो सका है।शहर के बहेरामपुरा निवासी रंजन सोलंकी (70) का आइसीयू में निधन हो गया था। पति और संतान नहीं होने के कारण उनकी बहन कमला को अस्पताल के काउंसलर ने अंगदान के लिए समझाया। बहन की सहमति से रंजनबेन की आंखें व त्वचा दान की गईं। यह निर्णय न केवल परोपकारी था बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बना।
उधर देवभूमि द्वारका जिले में जामखंभालिया के बुजुर्ग दिलीपभाई (66) का निधन होने पर उनके पुत्र सागर ने काउंसलिंग के बाद साहस भरा निर्णय लेते हुए अपने पिता की आंखें और त्वचा दान की। इस कदम से कई ज़रूरतमंद मरीजों को नई आशा और जीवन की रोशनी मिलने की संभावना बनी।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि इन 12 घंटों में दो भावनात्मक घटनाएं हुईं। जैसे अंगदान ज़रूरी है, वैसे ही नेत्रदान और त्वचा दान भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अस्पताल की ओर से विशेष अभियान चलाकर परिजनों को काउंसलिंग के माध्यम से प्रेरित किया जाता है।डा. जोशी के अनुसार अब तक सिविल अस्पताल को कुल 39 त्वचा और 184 नेत्र दान में प्राप्त हुए हैं। इन 223 पेशियों के साथ 228 ब्रेन-डेड अंगदाताओं से मिले 754 अंगों को जोड़ने पर अंग और पेशियों की कुल संख्या 977 हो गई।


