‘कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान किसानों की रीढ़’:पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों से की बात

‘कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान किसानों की रीढ़’:पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों से की बात

मोतिहारी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने रक्सौल जाते समय पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, पशु प्रजनन केंद्र और पंडित दीनदयाल उपाध्याय वानिकी एवं उद्यानिकी महाविद्यालय का भ्रमण किया। मंत्री ने वहां चल रहे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यों की जानकारी ली और वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। बैठक में मंत्री ने खेती में नई तकनीकों के उपयोग, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान किसानों की रीढ़ हैं और इनके प्रयासों से कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी मंत्री ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीकों के समावेश से कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत भी कम की जा सकती है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने और नई तकनीकों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का आग्रह किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने फिल्मों को लेकर उठ रहे विवादों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों का विरोध वे लोग कर रहे हैं, जो देश की सच्चाई को जनता तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं। कश्मीरी हिंदुओं की त्रासदी को दर्शाती है ‘द कश्मीर फाइल्स’ गिरिराज सिंह ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं की त्रासदी को दर्शाती है। उन्होंने इसे देश के युवाओं के लिए जानना जरूरी बताया, ताकि सामाजिक समरसता मजबूत हो सके। वहीं, ‘द केरल स्टोरी’ के संबंध में उन्होंने कहा कि यह फिल्म लव जिहाद, धर्मांतरण और लैंड जिहाद जैसे विषयों पर आधारित कहानी प्रस्तुत करती है। ”वोटबैंक की राजनीति करने वाले लोगों को ऐसी फिल्में पसंद नहीं” मंत्री ने आरोप लगाया कि वोटबैंक की राजनीति करने वाले लोगों को ऐसी फिल्में पसंद नहीं आतीं, क्योंकि इनसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आते हैं। उन्होंने सच दिखाने वाली फिल्मों की आलोचना करने के बजाय उनकी सराहना करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि समाज जागरूक हो और नई पीढ़ी वास्तविक घटनाओं से परिचित हो सके। बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनहित में जो भी उचित समझेगी, वही निर्णय लेगी। मोतिहारी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने रक्सौल जाते समय पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, पशु प्रजनन केंद्र और पंडित दीनदयाल उपाध्याय वानिकी एवं उद्यानिकी महाविद्यालय का भ्रमण किया। मंत्री ने वहां चल रहे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यों की जानकारी ली और वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। बैठक में मंत्री ने खेती में नई तकनीकों के उपयोग, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान किसानों की रीढ़ हैं और इनके प्रयासों से कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी मंत्री ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीकों के समावेश से कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत भी कम की जा सकती है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने और नई तकनीकों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का आग्रह किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने फिल्मों को लेकर उठ रहे विवादों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों का विरोध वे लोग कर रहे हैं, जो देश की सच्चाई को जनता तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं। कश्मीरी हिंदुओं की त्रासदी को दर्शाती है ‘द कश्मीर फाइल्स’ गिरिराज सिंह ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं की त्रासदी को दर्शाती है। उन्होंने इसे देश के युवाओं के लिए जानना जरूरी बताया, ताकि सामाजिक समरसता मजबूत हो सके। वहीं, ‘द केरल स्टोरी’ के संबंध में उन्होंने कहा कि यह फिल्म लव जिहाद, धर्मांतरण और लैंड जिहाद जैसे विषयों पर आधारित कहानी प्रस्तुत करती है। ”वोटबैंक की राजनीति करने वाले लोगों को ऐसी फिल्में पसंद नहीं” मंत्री ने आरोप लगाया कि वोटबैंक की राजनीति करने वाले लोगों को ऐसी फिल्में पसंद नहीं आतीं, क्योंकि इनसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आते हैं। उन्होंने सच दिखाने वाली फिल्मों की आलोचना करने के बजाय उनकी सराहना करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि समाज जागरूक हो और नई पीढ़ी वास्तविक घटनाओं से परिचित हो सके। बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनहित में जो भी उचित समझेगी, वही निर्णय लेगी।  

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