उन्नाव में गुरुवार शाम अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने एक पेंशन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, टीईटी अनिवार्यता के समाधान और निजीकरण के विरोध पर शिक्षक-कर्मचारियों को एकजुट करना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों और संगठनों के पदाधिकारी तथा शिक्षक-कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य सभी संगठनों के शीर्ष नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श कर भविष्य की रणनीति तैयार करना है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली को कर्मचारियों के हित में बताया। वक्ताओं के अनुसार, वर्तमान पेंशन व्यवस्था विफल साबित हो रही है, इसलिए पुरानी योजना को बहाल किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के मुद्दे को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों के बीच चिंता का विषय है। सभी शिक्षक संगठनों से अपील की गई कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर संघर्ष करें, ताकि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। वक्ताओं ने टीईटी और निजीकरण को आपस में जुड़े मुद्दे बताते हुए कहा कि ये सरकारी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। मंच के पदाधिकारियों ने निजीकरण का विरोध दोहराया और अपने पुराने नारे “पुरानी पेंशन बहाल करो और निजीकरण समाप्त करो” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें चाहें तो अपने स्तर पर निर्णय लेकर ओपीएस लागू कर सकती हैं। टीईटी मामले में भी विभागीय स्तर पर राहत दी जा सकती है, जैसा कि अन्य राज्यों में समकक्ष व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं। सरकार द्वारा मांगें न माने जाने की स्थिति में भविष्य की रणनीति पर वक्ताओं ने बताया कि फिलहाल प्रदेश भर में संवाद कर जनमत तैयार किया जा रहा है। अधिकांश संगठनों की राय है कि लखनऊ में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित कर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखी जाएं। जल्द ही लखनऊ कूच की तारीख तय कर व्यापक आंदोलन की रूपरेखा घोषित की जाएगी। कार्यक्रम का समापन शिक्षक-कर्मचारियों द्वारा एकजुटता का संकल्प लेने और “पुरानी पेंशन बहाल करो” तथा “शिक्षक-कर्मचारी एकता जिंदाबाद” के नारे लगाने के साथ हुआ।


