संयम और साधना से ही जीवन में होगी शांति

संयम और साधना से ही जीवन में होगी शांति

 बेंगलूरु

जीवनहल्ली में आयोजित धर्मसभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष चल रहा है और सभी को त्यागमय व अनुशासित जीवन अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयम और साधना से ही जीवन में शांति और संतुलन आता है।

विहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए साध्वी ने बताया कि जैन साधु-साध्वी पैदल विहार करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जैन धर्म के मूल सिद्धांतों अहिंसा, साधना, संयम और शांति के संदेश को समाज तक पहुंचाना है। वे मौन, संयम और कठोर तपस्या के साथ आगे बढ़ते हैं, जो धार्मिक अनुशासन का प्रतीक होने के साथ आमजन को आत्मसंयम और अहिंसा का संदेश भी देता है।

धर्मसभा में गीत के माध्यम से आचार्य भिक्षु की अभ्यर्थना की गई। साध्वी मार्दव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। साध्वी मनीषा प्रभा एवं रौनक प्रभा ने आचार्य के सान्निध्य में चल रहे योगक्षेम वर्ष के प्रारंभ से पूर्व के अनुष्ठानों की जानकारी दी।

तेरापंथ सभा विजयनगर के अध्यक्ष मंगल कोचर ने आगामी अक्षय तृतीया का कार्यक्रम विजयनगर में आयोजित करने का निवेदन किया। जितेंद्र घोषल ने साध्वी से शांतिनगर पधारने का आग्रह किया। साध्वी ने महावीर मुथा को तेले की तपस्या का प्रत्याख्यान करवाया।

रास्ते की सेवा में मंगल कोचर, विकास बांठिया, रौनक चौरड़िया, भरत रायसोनी, दीपक नांगावत, जितेंद्र घोषल, सुरेंद्र बैद, महावीर जितेश मुथा, रायचंद घोषल, राहुल कोठारी, अशोक कोठारी, जुगराज तातेड़, सौरभ यश हिरावत, सुदर्शन मुथा, विनोद नागर, विनोद नाहर, डॉ. राकेश धारीवाल, मुकेश सुराणा, कुणाल देवड़ा, प्रज्जवल देवड़ा, नेहा हिरावत और राखी नाहर सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सेवा का लाभ लिया।

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