अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिले पांच बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) अयोध्या के आदेश पर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। समिति के अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी, सदस्य सिद्धार्थ तिवारी, लल्लन प्रसाद अंबेश और स्मृता तिवारी ने बच्चों को बाल गृह, लखनऊ से परिवारों के सुपुर्द करने का निर्देश दिया था। आदेश के अनुपालन में देर रात बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। ये पांचों बच्चे 14 फरवरी को अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए थे। 18 फरवरी को बच्चों के परिजन न्यायपीठ, बाल कल्याण समिति अयोध्या के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि सभी बच्चे एक ही गांव के निवासी हैं और बिना किसी को बताए घर से निकल गए थे। समिति की पूछताछ में सामने आया कि संदीप नामक व्यक्ति बच्चों को 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर सिलीगुड़ी ले जाने की बात कह रहा था। परिजनों ने उस व्यक्ति के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने बताया कि जब बच्चों ने उन्हें फोन किया था, तो वे ठीक से बात नहीं कर पा रहे थे और उन्हें यह भी ज्ञात नहीं था कि वे अयोध्या पहुंच चुके हैं। परिजनों को आशंका है कि बच्चों को कोई नशीला पदार्थ दिया गया हो सकता है। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी ने परिजनों को पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के हंसीमारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने बच्चों से संबंधित काउंसलिंग प्रपत्र उपलब्ध कराते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन भी दिया। सर्वेश अवस्थी ने बताया कि इस मामले में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित सीडब्ल्यूसी और राज्य बाल आयोग को भी पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। उन्होंने चिंता जताई कि बच्चों का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और चाय बागान में कार्य करता है, जिससे भविष्य में भी ऐसे प्रलोभनों का खतरा बना रह सकता है।


