राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रमुख जयंत चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “जो हलवाई और ततैये का किस्सा सुना रहे हैं, उन्हें मैं बता दूं कि मुझे मीठे का कोई शौक नहीं।” इस पोस्ट के सामने आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
क्या था पूरा विवाद
दरअसल, बागपत में एक कार्यक्रम के दौरान नरेश टिकैत ने जयंत चौधरी पर कटाक्ष किया था। इस दौरान उन्होंने हलवाई और ततैया का उदाहरण दिया था। उनका कहना था कि सरकार में होने की वजह से जयंत चौधरी खुलकर सरकार के खिलाफ नहीं बोल सकते। जैसे हलवाई की दुकान पर बैठा ततैया हलवाई को नहीं काटता, बल्कि मिठाई पर बैठा रहता है, उसी तरह जयंत भी सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते।
राजनीतिक मायने क्यों निकाले जा रहे
“हलवाई-ततैया” का मुहावरा आमतौर पर सत्ता और लाभ के आसपास मंडराने वालों के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसे में जयंत का बयान यह दिखाने की कोशिश माना जा रहा है कि वे सत्ता लाभ की राजनीति से दूरी का संकेत दे रहे हैं।


