मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन में 15 फरवरी से शुरू हुए विक्रमोत्सव व्यापार मेले में वाहन खरीदारों की भारी भीड़ तो उमड़ रही है, लेकिन टैक्स छूट की प्रक्रिया अटकने से डीलर और ग्राहक दोनों परेशान हैं। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के पोर्टल अपडेट न होने की वजह से मेले में बिके वाहनों का टैक्स जमा नहीं हो पा रहा। नतीजा, एक हजार से ज्यादा वाहन बिना टैक्स चुकाए ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। डीलरों ने इनके इंश्योरेंस तो करा दिए, लेकिन अब टैक्स जमा न होने से पेनाल्टी का डर सता रहा है। ग्राउंड पर बात करने पर डीलरों ने बताया कि एक-दो दिन में सिस्टम चालू होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल असमंजस बरकरार है। इंदौर के मारुति डीलर अमन पटेल ने उज्जैन मेले में अपना स्टॉल लगाया है। पटेल ने कहा वाहन अच्छी संख्या में बिक रहे हैं, लेकिन एनआईसी का पोर्टल अपडेट नहीं है। ग्राहकों को नहीं मिल पा रहा छूट का लाभ हमने अधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि 25 दिसंबर 2025 से 25 फरवरी 2026 तक ग्वालियर में व्यापार मेला चल रहा है। नियमों के मुताबिक, एक राज्य में एक समय दो मेलों के लिए सिस्टम अपडेट नहीं हो सकता। इसी वजह से उज्जैन मेला पोर्टल पर एक्टिव नहीं किया जा रहा। अधिकारी एक-दो दिन में शुरू करने की बात कह रहे हैं। पटेल ने आगे बताया कि इस देरी से ग्राहकों को छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा और डीलरों को भी नुकसान हो रहा है। इंदौर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सह सचिव विशाल पमनानी ने कहा कि उज्जैन मेले में पहली बार ऐसी समस्या आ रही है। तीन दिनों में हजार वाहन बिके डीलरों के मुताबिक मेले के पहले तीन दिनों में करीब एक हजार वाहन बिक चुके हैं। इनका बीमा तो हो गया, लेकिन टैक्स एंट्री न होने से आगे की फॉर्मेलिटीज रुकी हुई हैं। एक डीलर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ग्राहक असमंजस में हैं। वे वाहन घर ले जाना चाहते हैं, लेकिन टैक्स जमा न होने से रजिस्ट्रेशन अटका है। प्रशासन से मांग की है कि जल्द पोर्टल अपडेट कर टैक्स प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि राजस्व भी आए और ग्राहकों को फायदा हो।” डीलरों को तीन दिन का अतिरिक्त समय देने की बात कही जा रही है, लेकिन अगर देरी बढ़ी तो पेनाल्टी लग सकती है। बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी उज्जैन व्यापार मेले में पिछले सालों से वाहन बिक्री में लगातार इजाफा हो रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में 23,705 वाहन बिके। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 36,223 हो गई। इस साल इससे भी ज्यादा बिक्री की उम्मीद है, लेकिन तकनीकी अड़चन अगर जल्द दूर न हुई तो मेले की रफ्तार थम सकती है। ग्राउंड पर घूमकर देखा तो स्टॉल्स पर ग्राहकों की भीड़ है, लेकिन डीलर चिंतित नजर आ रहे। प्रशासनिक अधिकारियों से बात की तो उन्होंने जल्द समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन फिलहाल सिस्टम डाउन ही है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मेलों में टैक्स छूट ग्राहकों को आकर्षित करती है, लेकिन सिस्टम की लेटलतीफी से विश्वास कम होता है। उज्जैन मेला विक्रमोत्सव का हिस्सा है, जो पर्यटन और व्यापार दोनों को बढ़ावा देता है। अगर ये अड़चनें बनी रहीं तो आने वाले दिनों में बिक्री प्रभावित हो सकती है। ग्राहकों से बात करने पर पता चला कि कई लोग इंदौर, देवास और आसपास से आए हैं, लेकिन अब इंतजार में हैं।


