मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर हुई छापेमारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि “परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर अब तक किस-किस एजेंसी ने क्या-क्या कार्रवाई की है?” चौंकाने वाली बात यह है कि दिसंबर 2024 में हुए देश के सबसे बड़े छापों में से एक के सवा साल बाद भी मुख्यमंत्री (गृह विभाग) की ओर से लिखित जवाब दिया गया कि “जानकारी एकत्रित की जा रही है।” यानी जिस मामले ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं, उसकी सटीक जानकारी फिलहाल प्रदेश सरकार के रिकॉर्ड में अपडेट नहीं है। छापेमारी के बाद भी ‘लापता’ है जानकारी दिसंबर 2024 में जब लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर दबिश दी थी, तब करोड़ों की नकदी और क्विंटल के हिसाब से चांदी बरामद हुई थी। जयवर्धन सिंह के सवाल पर सरकार का यह कहना कि ‘जानकारी जुटाई जा रही है’, कई सवाल खड़े करता है। क्या जांच एजेंसियां सरकार के साथ समन्वय नहीं कर रही हैं, या फिर इस हाई-प्रोफाइल मामले में जानकारी को सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है? लोकायुक्त को छापेमारी में क्या-क्या मिला था? लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सौरभ शर्मा के ठिकानों से जब्त की गई संपत्ति का विवरण इस प्रकार है: नकद राशि: छापेमारी के दौरान ₹2,83,23,000 (दो करोड़ 83 लाख से अधिक) कैश बरामद किया गया। सोना और हीरा: ₹50,37,425 की कीमत के सोने के आभूषण (558.64 ग्राम) और डायमंड आभूषण (10.80 कैरेट) मिले। चांदी: भारी मात्रा में चांदी बरामद हुई, जिसकी कीमत ₹2,10,50,716 (दो करोड़ 10 लाख से अधिक) आंकी गई है। इसका कुल वजन 233.936 किलोग्राम है। अचल संपत्ति (Real Estate): दस्तावेजों की जांच के आधार पर अनुमानित ₹30 करोड़ की अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। अन्य निवेश: बैंक एफडी (Fixed Deposits) के रूप में ₹3,08,46,158 जमा मिले हैं। साथ ही, वाहनों और अन्य घरेलू वस्तुओं की कीमत करीब ₹2.54 करोड़ बताई गई है। आयकर की कार्रवाई: इसी केस से जुड़ी एक लावारिस कार से बाद में 52 किलो सोना और ₹11 करोड़ कैश भी बरामद हुआ था। ED और IT की भी हुई थी एंट्री लोकायुक्त के बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) ने भी शिकंजा कसा था। ED ने फरवरी 2025 में सौरभ शर्मा और उसके करीबियों को गिरफ्तार भी किया था और करीब ₹92 करोड़ की संपत्ति अटैच करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बावजूद विधानसभा में सरकार का यह कहना कि ‘जानकारी एकत्रित की जा रही है’, विपक्षी खेमे को हमलावर होने का मौका दे रहा है। सवालों के घेरे में ‘सिपाही’ से ‘कुबेर’ बनने का सफर सौरभ शर्मा 2015 में अनुकंपा नियुक्ति पर परिवहन विभाग में आरक्षक बना था और मात्र 8 साल की नौकरी के बाद 2023 में उसने VRS ले लिया था। इतने कम समय में एक सिपाही ने करोड़ों का साम्राज्य कैसे खड़ा किया, इसकी जांच लोकायुक्त के साथ-साथ अब राजनीतिक अखाड़े में भी पहुंच गई है। सरकार ने बताए लोकायुक्त की टीमों में शामिल अधिकारी-कर्मचारियों के नाम दस्तावेजों के अनुसार, 19 और 20 दिसंबर 2024 को पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर की गई छापेमारी की कार्रवाई में विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), भोपाल और उज्जैन संभाग की दो अलग-अलग टीमें शामिल थीं। दो ठिकानों पर छापेमारी करने वाली टीमों में अलग-अलग सौरभ शर्मा के निजी निवास (मकान नं. ई-7/78, अरेरा कॉलोनी, भोपाल) पर कार्रवाई करने वाली इस टीम में मुख्य रूप से लोकायुक्त भोपाल संभाग की थी। सौरभ शर्मा के कार्यालयीन आवास (मकान नं. ई-7/657, अरेरा कॉलोनी, भोपाल) पर कार्रवाई करने वाली इस टीम में भोपाल और उज्जैन संभाग के अधिकारियों का संयुक्त दल शामिल था। यह खबरें भी पढ़ें… जिस कार में सोना-कैश मिला, वो छापे के समय दिखी परिवहन विभाग में रहकर करोड़ों की संपत्ति जुटाने वाले सौरभ शर्मा के ठिकानों पर कार्रवाई में लोकायुक्त पुलिस की लापरवाही सामने आई है। गुरुवार 19 दिसंबर को सुबह 6 बजे जब लोकायुक्त पुलिस की टीम ने सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी ई-7 स्थित मकान नंबर 78 और एक अन्य मकान ई-7/657 पर एक साथ कार्रवाई की। पढ़ें पूरी खबर…


