मौसम में बदलाव होने लगा है। सुबह-रात ठंड और दोपहर में गर्माहट है। इस कारण सीजनल बीमारी बढ़ गई है। पटना के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। IGIMS, PMCH और AIIMS पटना जैसे बड़े अस्पतालों में बुधवार को भारी भीड़ देखी गई, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचे। आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को IGIMS की ओपीडी में 4339 मरीज पहुंचे, जबकि PMCH की ओपीडी में 1930 और एम्स पटना में 2870 मरीजों ने इलाज कराया। ओपीडी खुलने के साथ ही रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्षों तक लंबी कतारें लग गईं। मरीजों और उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ा। आईजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण सर्दी, बुखार, जुकाम, शरीर दर्द, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। मरीजों ने क्या कहा… 2 घंटे तक इंतजार करना पड़ा
जहानाबाद के ग्रामीण क्षेत्र से आए 60 वर्षीय शिवनाथ यादव सुबह आईजीआईएमएस पहुंचे। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और टोकन की प्रक्रिया समझ नहीं आने के कारण काफी देर तक भटकते रहे। किसी तरह पर्ची बनवाने के बाद भी डेढ़ से 2 घंटे तक ओपीडी चैंबर के बाहर इंतजार करना पड़ा। बुजुर्ग ने कहा कि उम्र अधिक होने के कारण लाइन में खड़ा रहना मुश्किल था और ज्यादा भीड़ होने के कारण बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी।
एक भवन से दूसरे भवन तक भटकना पड़ा
मोतिहारी से पति के साथ इलाज कराने आईं 35 वर्षीय सुनैना देवी ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं थी और न ही यह पता था कि किस विभाग में जाना है। कई बार अलग-अलग काउंटरों पर भेजा गया। जांच के लिए एक भवन से दूसरे भवन तक जाना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए मार्गदर्शन की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, नहीं तो सबसे अधिक परेशानी उन्हीं को उठानी पड़ती है। कौन से विभाग में कितने मरीज बुधवार को IGIMS में विभागवार मरीजों की संख्या इस प्रकार रही… नेत्र रोग विभाग में 533, जनरल मेडिसिन में 411, न्यूरो मेडिसिन में 367, कार्डियोलॉजी में 348 और पल्मोनरी मेडिसिन में 279 मरीज देखे गए।
ऐसी ही स्थिति रही तो विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई जाएगी डॉ. मंडल ने बताया कि यदि मरीजों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो अगले एक-दो दिनों में विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई जाएगी। इसका उद्देश्य है कि जांच और इलाज की व्यवस्था प्रभावित न हो और सभी मरीजों को उचित उपचार मिल सके। इस बीच, अस्पताल पहुंचे कई मरीजों और उनके परिजनों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और टोकन लेने की प्रक्रिया को लेकर परेशानी जताई। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों से आए बुजुर्ग और महिलाएं मोबाइल या ऑनलाइन प्रक्रियाओं को समझने में असमर्थ रहीं, जिससे उन्हें भटकना पड़ा। कई मरीजों को यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी कि उन्हें किस जांच के लिए किस काउंटर या विभाग में जाना है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। मौसम में बदलाव होने लगा है। सुबह-रात ठंड और दोपहर में गर्माहट है। इस कारण सीजनल बीमारी बढ़ गई है। पटना के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। IGIMS, PMCH और AIIMS पटना जैसे बड़े अस्पतालों में बुधवार को भारी भीड़ देखी गई, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचे। आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को IGIMS की ओपीडी में 4339 मरीज पहुंचे, जबकि PMCH की ओपीडी में 1930 और एम्स पटना में 2870 मरीजों ने इलाज कराया। ओपीडी खुलने के साथ ही रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्षों तक लंबी कतारें लग गईं। मरीजों और उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ा। आईजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण सर्दी, बुखार, जुकाम, शरीर दर्द, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। मरीजों ने क्या कहा… 2 घंटे तक इंतजार करना पड़ा
जहानाबाद के ग्रामीण क्षेत्र से आए 60 वर्षीय शिवनाथ यादव सुबह आईजीआईएमएस पहुंचे। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और टोकन की प्रक्रिया समझ नहीं आने के कारण काफी देर तक भटकते रहे। किसी तरह पर्ची बनवाने के बाद भी डेढ़ से 2 घंटे तक ओपीडी चैंबर के बाहर इंतजार करना पड़ा। बुजुर्ग ने कहा कि उम्र अधिक होने के कारण लाइन में खड़ा रहना मुश्किल था और ज्यादा भीड़ होने के कारण बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी।
एक भवन से दूसरे भवन तक भटकना पड़ा
मोतिहारी से पति के साथ इलाज कराने आईं 35 वर्षीय सुनैना देवी ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं थी और न ही यह पता था कि किस विभाग में जाना है। कई बार अलग-अलग काउंटरों पर भेजा गया। जांच के लिए एक भवन से दूसरे भवन तक जाना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए मार्गदर्शन की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, नहीं तो सबसे अधिक परेशानी उन्हीं को उठानी पड़ती है। कौन से विभाग में कितने मरीज बुधवार को IGIMS में विभागवार मरीजों की संख्या इस प्रकार रही… नेत्र रोग विभाग में 533, जनरल मेडिसिन में 411, न्यूरो मेडिसिन में 367, कार्डियोलॉजी में 348 और पल्मोनरी मेडिसिन में 279 मरीज देखे गए।
ऐसी ही स्थिति रही तो विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई जाएगी डॉ. मंडल ने बताया कि यदि मरीजों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो अगले एक-दो दिनों में विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई जाएगी। इसका उद्देश्य है कि जांच और इलाज की व्यवस्था प्रभावित न हो और सभी मरीजों को उचित उपचार मिल सके। इस बीच, अस्पताल पहुंचे कई मरीजों और उनके परिजनों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और टोकन लेने की प्रक्रिया को लेकर परेशानी जताई। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों से आए बुजुर्ग और महिलाएं मोबाइल या ऑनलाइन प्रक्रियाओं को समझने में असमर्थ रहीं, जिससे उन्हें भटकना पड़ा। कई मरीजों को यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी कि उन्हें किस जांच के लिए किस काउंटर या विभाग में जाना है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।


