झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) में वित्तीय प्रबंधन की गंभीर चूक सामने आई है। यहां 26.79 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने की बजाय चालू खाते में डाल दिया गया। इससे 1.66 करोड़ रुपए के ब्याज का नुकसान हुआ। प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) ने इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। जैक को पत्र लिखकर जवाब मागा है। साथ ही इससे जुड़ी फाइलें भी मांगी हैं। इस वित्तीय लापरवाही के लिए फाइनेंस अफसर राजेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। राजेश की नियुक्ति 2016 में 11 महीने के लिए हुई थी। इसके बाद से उन्हें लगातार सेवा विस्तार दिया जाता रहा है। प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) झारखंड के एएमजी-IV विंग की ओर से जारी पत्र में पारा संख्या 2(ए) 1एसी से संबंधित समस्त फाइलें और सपोर्टिंग दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। लंबे समय के बाद भी जैक की ओर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। कहा गया है कि इससे ऑडिट प्रभावित हो रहा है। वित्त पदाधिकारी के खिलाफ सीएम को भी हुई थी शिकायत वित्त पदाधिकारी की योग्यता को लेकर इससे पहले मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद सरकार के अवर सचिव आलोक कुमार ने जैक को जांच और जरूरी कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था। हालांकि इसके बाद कोई कार्रवाई हुई। उधर, राजेश कुमार ने कहा कि योग्यता के आधार पर ही मेरा चयन हुआ था। मुझ पर उठाए गए सभी सवाल निराधार हैं।


