वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं की सीबीएसई और सीआईएससीई एवं झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से उनकी पढ़ाई, एकाग्रता तथा परीक्षा की तैयारी में बाधा उत्पन्न हो रही है। बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर जिला प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सदर एसडीओ कुमार रजत को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। नगर निगम चुनाव के प्रत्याशी, प्रचार वाहन, बार व रेस्टोरेंट संचालक अथवा अन्य आयोजक यदि तय सीमा से अधिक ध्वनि का उपयोग करते पाए गए तो वाहन या उपकरण जब्त किए जाएंगे। जिला प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी शिकायत के लिए अबुआ साथी का मोबाइल नंबर 9430328080 जारी किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी शिकायत कर सकते हैं। 50 डेसिबल से अधिक निरंतर शोर से एकाग्रता में कमी, तनाव जैसी समस्याएं बोर्ड परीक्षाएं छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 50 डेसिबल से अधिक निरंतर शोर पढ़ाई की क्षमता प्रभावित करता है। इससे एकाग्रता में कमी, याददाश्त पर असर, तनाव और चिड़चिड़ापन और नींद में बाधा जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। 85 डेसिबल से अधिक शोर सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं की सीबीएसई और सीआईएससीई एवं झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से उनकी पढ़ाई, एकाग्रता तथा परीक्षा की तैयारी में बाधा उत्पन्न हो रही है। बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर जिला प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सदर एसडीओ कुमार रजत को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। नगर निगम चुनाव के प्रत्याशी, प्रचार वाहन, बार व रेस्टोरेंट संचालक अथवा अन्य आयोजक यदि तय सीमा से अधिक ध्वनि का उपयोग करते पाए गए तो वाहन या उपकरण जब्त किए जाएंगे। जिला प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी शिकायत के लिए अबुआ साथी का मोबाइल नंबर 9430328080 जारी किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी शिकायत कर सकते हैं। 50 डेसिबल से अधिक निरंतर शोर से एकाग्रता में कमी, तनाव जैसी समस्याएं बोर्ड परीक्षाएं छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 50 डेसिबल से अधिक निरंतर शोर पढ़ाई की क्षमता प्रभावित करता है। इससे एकाग्रता में कमी, याददाश्त पर असर, तनाव और चिड़चिड़ापन और नींद में बाधा जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। 85 डेसिबल से अधिक शोर सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।


