पोकरण से बाड़मेर. पोकरण से बाड़मेर वाया सांकड़ा, भैंसड़ा, फतेहगढ़, शिव का सफर करीब 200 किलोमीटर। इस रूट पर रोडवेज की बस शून्य। हालांकि जैसलमेर से बाड़मेर वाया फतेहगढ़-शिव जाने वाली कुछ बसें चलती है, लेकिन पोकरण-सांकड़ा से कोई बस नहीं है। ऐसे में यात्रियों को मजबूरन निजी बसों में सफर करना पड़ता है। मंगलवार को पोकरण से बाड़मेर तक का सफर कर बसों की पड़ताल की गई। जैसलमेर में हादसे के बाद निजी बसोंं में आपातकालीन दरवाजे तो लगा दिए है, लेकिन कहीं दरवाजों के आगे सीटें लगा दी गई है तो कहीं पर्दे होने के कारण दरवाजे नजर नहीं आते है। यही नहीं कुछ बसों में तो आपातकालीन दरवाजे खोलने के लिए हैण्डल की गायब है।
परिचालक का अजीब तर्क …यात्री खींचते लीवर, रहता हादसे का डर
इस बारे में जब परिचालक से पूछा तो उसने बताया कि चलती बस या कहीं रुकने पर यात्री अनजाने में लिवर खींच लेते है। जिससे दरवाजा खुल जाता है और हादसे का भय बना रहता है।क्षमता से अधिक सवारियां निजी बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरकर खुलेआम यात्रा करवाई जा रही है। हालांकि परिवहन विभाग की सख्ती के बाद छतों पर तो सवारियां नहीं बिठाई जाती, लेकिन सीटों के अलावा बीच की गली और दरवाजे के आसपास यात्रियों की भीड़ देखी जा सकती है।
50 सीटर बस में 70 सवारियां, जहां मर्जी वहां रुक रही बस
45 से 50 सीटर की बस में 60 से 70 सवारियां बिठाना बस संचालकों के लिए नया नहीं है।सीसीटीवी लग गए, अग्निशमन व हैमर नहीं निजी बसों में सीसीटीवी अब आम बात हो गई है। छोटी से बड़ी निजी बसों में चालक के पास दो कैमरे, ताकि चालक व केबिन की हलचल दिख सके और दूसरे कैमरे से सामने की सडक़ दिखाई दे सके। इसी प्रकार बस के अंदर सवारियों पर एक सीसीटीवी कैमरा। जिससे हर हलचल पर नजर रखी जा सके। दूसरी तरफ अग्निशमन व हैमर कुछ ही बसों में नजर आ रहे है। कुछ बसों में अग्निशमन तो है, लेकिन हैमर नहीं। ऐसे में आपातकाल परिस्थिति में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
बिना स्टैंड ही रुकती है बसें
पोकरण से बाड़मेर रूट पर देखा गया कि कहीं पर भी खड़े यात्रियों को लेने व छोडऩे के लिए स्टैंड की जरुरत नहीं होती। सवारियां ने जहां इशारा किया, बस रुक जाती है। चाहे सवारियां लेनी हो या उतारनी हो।


