गला रेतने से IED ब्लास्ट तक… 3 लाख के इनामी नक्सली ने टेके घुटने, AK-47 और AK-56 समेत गोलियों-बंदूकों का जखीरा सौंपा

गला रेतने से IED ब्लास्ट तक… 3 लाख के इनामी नक्सली ने टेके घुटने, AK-47 और AK-56 समेत गोलियों-बंदूकों का जखीरा सौंपा

Bihar News: बिहार पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बुधवार को अपने लगातार नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी जीत हासिल की। ​​सुरेश कोड़ा उर्फ ​​मुस्तकीम, एक कुख्यात नक्सली और CPI (माओवादी) की स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) का सक्रिय सदस्य, जो दो दशकों से ज्यादा समय से बिहार और झारखंड में आतंक का पर्याय था, ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। उसने मुंगेर रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) और बिहार STF के सीनियर अधिकारियों के सामने अपने खतरनाक हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया।

हथियारों का जखीरा बरामद

सुरेश कोड़ा ने सरेंडर के दौरान जो हथियार सौंपे हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। बरामद हथियारों में एक AK-47 राइफल, एक AK-56 राइफल और दो INSAS राइफल जैसी खतरनाक राइफलें शामिल हैं। कुल 505 जिंदा कारतूस (INSAS-215, SLR-197 और AK-47 की 93 गोलियां) और 10 हाई-कैपेसिटी मैगज़ीन भी बरामद की गईं।

60 संगीन वारदातों का मास्टरमाइंड

सुरेश कोड़ा पिछले 25 वर्षों से फरार चल रहा था और मुंगेर, लखीसराय तथा जमुई के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में संगठन का संचालन कर रहा था। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, पुलिस पर हमले और IED विस्फोट जैसे 60 से अधिक नक्सल कांड दर्ज हैं। वर्ष 2008 से 2022 के बीच उसने कई सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम दिया।

सुरेश कोड़ा के कुछ सबसे चर्चित और बर्बर कारनामे

  • चौकीदार की हत्या (2008): धरहरा थाना क्षेत्र में एक चौकीदार की गला काटकर नृशंस हत्या कर दी थी।
  • पुलिस और एसएसबी पर हमला: 2018 में एक एसएसबी (SSB) जवान की हत्या में वह मुख्य आरोपी था। वह कई बार पुलिस मुठभेड़ में घिरने के बावजूद एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर भागने में सफल रहा था।
  • मुखिया और ग्रामीणों की हत्या: 2017 में लखीसराय के कजरा में मुखिया की हत्या और 2018 में जमुई में दो सगे भाइयों की हत्या कर उसने अपनी क्रूरता की मिसाल पेश की थी।
  • आगजनी: झील निर्माण कार्य में लगे 7 वाहनों को फूंकना और सरकारी कार्यालयों में विस्फोट कर कागजात जलाना उसकी मुख्य गतिविधियों में शामिल था।

12 लाख रुपये से ज्यादा की सहयाता करेगी सरकार

बिहार सरकार की सरेंडर और पुनर्वास पॉलिसी के तहत, सुरेश कोड़ा और उसके परिवार के बेहतर भविष्य के लिए एक आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है। इसके तहत, सुरेश कोड़ा को 300,000 रुपये का घोषित मिलेगा। सरेंडर करने का 500,000 का इनाम। 36 महीनों के लिए हर महीने 10,000 का जॉब-ओरिएंटेड ट्रेनिंग अलाउंस (कुल 360,000 रुपया)। सरेंडर किए गए हथियारों के लिए 71,515 रुपये का एक्स्ट्रा इनाम। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पॉलिसी उन नक्सलियों को मेनस्ट्रीम में वापस लाने के लिए बनाई गई है जो हिंसा छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी जीत

मुंगेर DIG के मुताबिक, सुरेश कोड़ा का सरेंडर सिर्फ एक अकेले का सरेंडर नहीं है, बल्कि उन दूर-दराज के इलाकों में माओवादी सोच के कमजोर होने का संकेत है, जहां कभी सुरेश का दबदबा था। इस सरेंडर के बाद, सुरक्षा बल अब उन सीक्रेट ठिकानों और नेटवर्क को खत्म करने पर काम कर रही हैं, जिनके बारे में सुरेश ने पूछताछ में बताया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *